जिले के मैदानी क्षेत्र में भी बारिश ने खूब आफत पैदा की है। हालांकि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन मलबा आने से बाधित रहे टनकपुर-चंपावत एनएच के यात्रियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। चल्थी में मलबा आने के साथ ही सूखीढांग से पहले अमरू बैंड में भी सड़क काफी कट गई है। अलबत्ता इससे मार्ग बाधित नहीं है। इधर, उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम का मार्ग भी 72 घंटे से बंद पड़ा है।
बृहस्पतिवार रात से लगातार हुई बारिश से टनकपुर-चंपावत एनएच बंद होने से चंपावत, लोहाघाट, पिथौरागढ़ एवं धारचूला के यात्रियों को परेशानी का सामना पड़ा। चल्थी में मलबा आते ही प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से टनकपुर और चंपावत से आगे वाहनों के जाने पर रोक लगा दी थी, जिसके चलते पर्वतीय मार्ग के यात्री टनकपुर में ही फंसे रहे।
मजबूरीवश उन्हें होटलों में ठहरना पड़ा। कई यात्री तो अधिक किराया देकर वाया हल्द्वानी होते हुए पिथौरागढ़ के लिए रवाना हुए। पर्वतीय मार्ग पर जाने वाले वाहनों को प्रशासन ने मार्ग खुलने तक ककरालीगेट से आगे जाने से रोके रखा। वहां सुबह से ही वाहनों की लंबी कतार लगी रही और दोपहर तक मार्ग खुलने की प्रतीक्षा में यात्रियों को घंटों तक बैठना पड़ा।
एसडीएम नरेश दुर्गापाल और सीओ आरएस रौतेला मार्ग खुलवाने को सुबह ही चल्थी रवाना हो गए थे। एसडीएम ने बताया कि दोपहर करीब 12 बजे मलबा हटाकर मार्ग खोला जा सका। उन्होंने बताया कि एनएच के अधिकारियों को अमरूबैंड में हुए सड़क के कटाव को रोकने के उपाय करने को कहा गया है। वहीं लोनिवि के अधिकारियों को भी मां पूर्णागिरि धाम मार्ग पर बाटनागाड़ में आया मलबा शीघ्र हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
पूर्णागिरि दर्शन पर लगी है रोक
पूर्णागिरि धाम के मुख्य मंदिर के पास पहाड़ी के दरकने से दर्शन पर लगाई गई रोक जारी है। मंदिर कमेटी ने काली मंदिर गेट पर ताला लगाया है। कमेटी अध्यक्ष किशन तिवारी ने बताया कि बारिश में भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं, जिन्हें काली मंदिर में पूजा-अर्चना की रस्म करा कर लौटाया जा रहा है। एसडीएम नरेश दुर्गापाल ने बताया कि वर्षाकाल के बाद ही मंदिर के पास दरकी पहाड़ी का मलबा हटाकर रास्ता खुलवाया जाएगा।