जिले में पलायन के कारण खाली हो रहे सीमांत क्षेत्र के गांवों को फिर से आबाद करने और पलायन पर रोक लगाने के लिए सड़कों की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में दूरस्थ गांवों तक सड़क पहुंचने के बाद ही पलायन पर प्रभावी अंकुश लग सकेगा। इस संबंध में सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणों ने डीएम एसएन पांडेय के समक्ष गुहार लगाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि लेटी-रियांसी-बमनगांव मोटर मार्ग को निर्माणाधीन टनकपुर-जौलजीबी मोटर मार्ग से जोड़ दिया जाता है तो यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग के बाधित होने पर वैकल्पिक मार्ग बन सकता है। ग्रामीणों के अनुसार लेटी-रियांसी-बमनगांव सड़क का निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत किया जा रहा है। सड़क का निर्माण आमड़ा तक किया जा रहा है। यहां से टनकपुर-जौलजीबी सड़क की दूरी पांच किलोमीटर है।
वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित होने के कारण कई दिनों से चंपावत जिलेे का कारोबार प्रभावित हो रहा है। शासन प्रशासन की ओर से मार्ग में कोई डायवर्जन भी नहीं बनाए जाने के कारण यह मार्ग वैकल्पिक मार्ग के रूप में प्रयुक्त हो सकता है। महा सिंह, पूर्व प्रधान तरकुली।
सड़क सुविधा की कमी के कारण सीमांत क्षेत्र के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वैकल्पिक मार्ग के रूप में लेटी-रियासी -बमनगांव को टनकपुर-जौलजीबी मोटर मार्ग से मिलाने पर न सिर्फ सीमांत क्षेत्र की दिक्कतें दूर होंगी बल्कि सबको राहत मिलेगी। पान सिंह, पूर्व प्रधान।
सडक़ सुविधा से वंचित सीमांत क्षेत्र के लिए जहां टनकपुर-जौलजीबी मोटर मार्ग एक वरदान के तौर पर बनी है। यदि इसे आंतरिक मोटर मार्ग से जोड़ दिया गया तो सभी को इसका लाभ मिलेगा। जगत राम, ग्रामीण।
सीमांत क्षेत्र में बीएडीपी सहित तमाम योजनाओं का संचालन किया जा रहा है लेकिन सड़क सुविधा की कमी के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लेटी-रियांसी-बमनगांव सड़क को टनकपुर-जौलजीबी से जोड़ा जाएगा तो लाभ होगा। पूरन सिंह, ग्रामीण।
पान सिंह, पूर्व प्रधान।- फोटो : CHAMPAWAT
जगत राम, ग्रामीण।- फोटो : CHAMPAWAT