ग्रामीणों के विरोध के चलते पावर ग्रिड कारपोरेशन ने देशीफार्म में रेलवे फाटक के पास रखी निर्माण सामग्री हटाने के साथ ही मजदूरों और चौकीदारों को वापस बुला लिया है। सोमवार को ग्रामीणों के साथ पावर ग्रिड के डीजीएम की वार्ता बेनतीजा रही। ग्रामीणों ने बताया कि सोमवार देर रात पावर ग्रिड कर्मी फिर से पीड़ित ग्रामीणों ने मिले, लेकिन कोई नतीजा नही निकला।
रेलवे के ब्राडगेज निर्माण के बाद देशीफार्म में नया रेलवे फाटक का निर्माण कराया जाना है। इसके लिए पावर ग्रिड के हाइटेंशन लाइन टावर की ऊंचाई बढ़ाई जानी है। पावर ग्रिड के डीजीएम डीडीआर कुशवाह के मुताबिक बिना हाइटेंशन लाइनों को ऊंचा किए वहां रेलवे द्वारा ट्रेन चलाने को अनुमति नहीं दी जाएगी। मानकों के तहत ट्रेन की ऊंचाई से हाइटेंशन लाइनों को सात मीटर ऊंचा रखना जरूरी है। इसके लिए फाटक के पास के दो टावरों की ऊंचाई 15 मीटर की जानी है।
टावर की ऊंचाई बढ़ाने में ग्रामीण मोहनी देवी, नैन सिंह और नारायण चंद की काफी कृषि भूमि नष्ट हो रही है। वे बिना मुआवजा अपनी भूमि विभाग को नहीं देने पर अड़े हैं। इस संबंध में उन्होंने जिला प्रशासन को अवगत करा दिया है। पावर ग्रिड के अधिकारियों के अनुसार हाइटेंशन लाइनों के नीचे भवन निर्माण या खेती करने पर प्रतिबंध है। ग्रामीणों का कहना है कि इस नियम के तहत हाइटेंशन लाइनों के नीचे की भूमि बिना मुआवजे के विभाग ने कब्जा ली है। फिलहाल पावर ग्रिड द्वारा टावर ऊंचा करना खटाई में पड़ गया है।