चंपावत। चंपावत जिला अस्पताल में ओपीडी बंद होने पर भी आकस्मिक सेवाओं और गर्भवती महिलाओं के लिए इलाज सुचारु होने का दावा किया गया है। लेकिन ओपीडी बंद होने से एक दिन पहले शुक्रवार को ही पाटी की गर्भवती महिला को जिला अस्पताल में इलाज को तरसना पड़ा। गर्भवती महिला के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने देखे बगैर महिला को हायर सेंटर रेफर किया गया। लेकिन परिजन महिला को चंपावत के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां ऑपरेशन से महिला ने नवजात को दिया।
पाटी क्षेत्र की गर्भवती महिला नीमा गहतोड़ी (21) को एकाएक प्रसव पीड़ा होने पर शुक्रवार को पाटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां से गर्भवती को चंपावत जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। गर्भवती महिला 108 एंबुलेंस के जरिये शुक्रवार करीब एक बजे जिला अस्पताल लाई गई। नीमा के पति राकेश गहतोड़ी का आरोप है कि अस्पताल में उनकी गर्भवती पत्नी को किसी ने नहीं देखा। बस पिछले माह की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखकर कह दिया कि गर्भवती महिला की हालत बेहद खराब है। साथ ही उन्हें हल्द्वानी जाने की सलाह दे दी गई। पति का आरोप है कि अस्पताल कर्मियों ने कुछ डॉक्टरों के कोरोना संक्रमित होने से इलाज नहीं मिलने की भी बात कही। अलबत्ता गर्भवती महिला को हल्द्वानी ले जाने के बजाय चंपावत के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां ऑपरेशन से नवजात का जन्म हुआ।
सामान्य रूप से गर्भवती महिलाओं को जिला अस्पताल में उपचार दिया जा रहा है। लेकिन शुक्रवार को सैनिटाइज किए जाने से अस्पताल की डिलीवरी रूम बंद था। अस्पताल कर्मियों को गर्भवती महिला को सही जानकारी देकर संतुष्ट करना चाहिए था।
डॉ. आरके जोशी,
पीएमएस, जिला अस्पताल।