चंपावत। टनकपुर- पिथौरागढ़ सड़क बीते 15 दिनों से यातायात के लिए बंद होने के कारण चंपावत जिले के साथ-साथ पिथौरागढ़ से रेफर होकर आ रहे मरीजों को स्वाला के रेंजर जोन में जिंदगी और मौत की एक नई जंग जितनी पड़ रही है। यहां पर सड़क पार करने के लिए मरीजों को स्थानीय युवाओं और अन्य लोगों की ओर से डोली के सहारे सड़क पार कराई जा रही है। पहाड़ी से गिर रहे पत्थर के साथ-साथ नीचे कीचड़ में पैर फंसने का भी डर बना हुआ है।
12 सितंबर से स्वाला के पास किमी 106 पर यातायात आवाजाही के लिए बाधित चल रहा है। 17 सितंबर को पांच दिन बाद यातायात के लिए सुचारु तो हुआ, लेकिन उसके बाद सुरक्षा के मद्देनजर जिला प्रशासन ने चार घंटे के लिए रोज हल्के वाहनों के लिए खोलने का निर्णय लिया। पांच दिनों से सभी प्रकार के वाहनों के लिए पूर्ण रूप से बंद चल रहे हैं। शुक्रवार को देर शाम अमोड़ी निवासी पार्वती देवी, कमला देवी सहित अन्य मरीजों को भी इस प्रक्रिया से गुजरा पड़ा।
कोट
ऑलवेदर सड़क पर करोड़ों खर्च करने के बाद भी हालत बद से बदतर होते जा रहे हैं। व्यापारी, मरीज, आम जनता परेशान है। स्वाला पर किसी का भी ध्यान नहीं है। लगातार नये डेंजर जोन बन रहे हैं। डेंजर जोन पर पुल का निर्माण होना था, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। - पूरन कठायत, कांग्रेस जिलाध्यक्ष, चंपावत।