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शराब के नहीं, पशु आहार के दाम कम करो

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पशु आहार के दामों में कमी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते दुग्ध उत्पादक। - फोटो : LOHAGHAT
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लोहाघाट (चंपावत)। अप्रैल से शराब के दामों में कमी करने से दुग्ध उत्पादक और ग्रामीण क्षेत्र के लोग भड़क गए हैं। उन्होंने शराब की कीमतों में कमी करने का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया। साथ ही दूध और अन्य रोजमर्रा की सामग्री को वाजिब मूल्य पर उपलब्ध कराने की मांग की है। केशव दत्त चौबे, गीता देवी, बलवंत सिंह, कमला राय, रघुवर दत्त राय, हेमा देवी आदि का कहना है कि शराब के दाम कम होने से लोग नशे के दलदल में फंसेंगे।
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गांव के दुग्ध उत्पादकों का दूध पानी के भाव बिकता है। जबकि वे महंगा पशु आहार खरीदते हैं। सरकार को चाहिए कि शराब नहीं, पशु आहार के दाम कम करें।
केशव दत्त चौबे, सुंई।
शराब की कीमतें कम होने से नशे का कारोबार और फैलेगा। शराब के बजाय लोगों के रोजमर्रा में उपयोग में आने वाले सामान के दाम कम किए जाने चाहिए।
गीता देवी, रायनगर चौड़ी।
सस्ती शराब से नशाखोरी बढ़ेगी। और इसकी मार नौजवानों के भटकाव के रूप में सामने आ सकती है। इससे बेहतर ग्रामीण उत्पादों को प्रोत्साहित कर पलायन रोकने का प्रयास हो।
बलवंत सिंह, कोयाटी।
शराब की कीमत कम होने से घरों में अक्सर झगड़े होंगे। महिलाओं और बच्चों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। सरकार का यह कदम तर्कपूर्ण नहीं है।
कमला राय, चौड़ी।
सरकार को शराब के कारोबारियों और शराब से मिलने वाले राजस्व की अधिक चिंता है। बेहतर हो कि सरकार शराब के दाम बढ़ा कर ग्रामीण जीवन से जुड़ी सामग्रियों की कीमतें कम हो।
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रघुवर दत्त राय, गल्लागांव।
शराब के दाम कम होने से महिलाएं फिक्रमंद है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में माहौल बिगड़ने का खतरा बढ़ेगा। सरकार गांव के लोगों की बुनियादी सुविधा बढ़ाए।
हेमा देवी, रायनगर चौड़ी।
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