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500 रुपये के मुआवजे को खर्च हो गए दो हजार रुपये

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तेंदुए द्वारा मारी गई गाय के मुआवजे रूप में वन विभाग से मिले पांच सौ रूपये का चैक दिखाता दिव्यांग ? - फोटो : LOHAGHAT
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दूरस्थ गांव खोलिया नाकोट के एक दिव्यांग की गाय को तेंदुए द्वारा मौत के घाट उतारने के बाद मुआवजे के लिए ऐड़िया रगड़नी पड़ी, लेकिन तीन वर्ष बाद मुआवजा महज 500 रुपये मिला। इस रकम को पाने के लए दिव्यांग युवक को करीब दो हजार रुपये खर्च करने पड़े। अब दिव्यांग वन विभाग को चेक वापस देने पर विचार कर रहा है।
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दिव्यांग मोहन चंद्र भट्ट का कहना है कि तीन साल पूर्व तेंदुए ने उनकी गाय पर हमला कर मौत के घाट उतार दिया था। दिव्यांग भट्ट ने मुआवजे के लिए वन विभाग को पूरी पत्रावली सौंपी। मुआवजे की आस में उन्होंने कई चक्कर लोहाघाट और चंपावत वन विभाग दफ्तर के लगाए। तीन वर्ष बाद लोहाघाट रेंज कार्यालय से मुआवजा लेने का पत्र मिला। जब उन्होंने मंगलवार को मुआवजे का 500 रुपये का चेक देखा, तो वे हैरान रह गए। दिव्यांग भट्ट का कहना है कि बीते तीन साल तक मुआवजे के लिये दौड़भाग में उसके दो हजार रुपये से अधिक खर्च हो गए। डीएफओ केएस बिष्ट का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी।
तेंदुए के दुधारू गाय को मारने पर विभाग 15 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है। इसके लिए पीड़ित व्यक्ति को फाइल बनाकर साक्ष्यों के साथ संबंधित रेंज कार्यालय में जमा करनी होती है, जहां से उस फाइल को डिवीजन भेज दिया जाता है। एसडीओ के नेतृत्व में गठित समिति फाइल की जांच कर मुआवजा तय करती है।
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दीप जोशी, वन क्षेत्राधिकारी, लोहाघाट।
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