लोहाघाट विकासखंड के पुलहिंडोला में नुकुल पंत का परिवार पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए आसमान पर आश्रित हैं। बारिश बहुतायत में यहां के लोगों की पानी की जरूरत की पूर्ति करती है। पीने को छोड़ शेष तमाम कार्यों के लिए इस बरसाती पानी का उपयोग किया जाता है। और बारिश के पानी को टैंक के जरिए बचाया जाता है। पेयजल संकट से जूझ रहे पुलहिंडोला में जल संचय की ये प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।
डेढ़ हजार से अधिक आबादी वाले पुलहिंडोला में एक भी सरकारी पेयजल योजना नहीं है। सरकारी मदद के नाम पर महज छह हैंडपंप हैं, लेकिन तीन इनमें से खराब हैं। तीन ठीक हैंडपंपों में से भी दो में बेहद सुस्त रफ्तार से पानी मिल रहा है। मात्र एक हैंडपंप से कायदे से पानी मिल रहा है। पानी की घोर किल्लत के बीच पुलहिंडोला में लोगों ने बरसात के पानी को बचाने की मुहिम शुरू की है। 2015 के आखिर से शुरू यह मुहिम विशेष मुकाम तक तो नहीं पहुंची है, लेकिन इस शुरुआत ने लोगों की पेयजल जागरूकता को जरूर बढ़ाया है। अब लोग बारिश के पानी की भी कीमत समझने लगे हैं।
नौजवान नुकुल पंत ने बारिश के पानी को बर्बाद होने से रोकने के लिए मकान की छत में पानी को बचाने की कोशिश की। टैंक बना छत के पानी को पाइप के जरिए वहां तक पहुंचाया गया। एक हजार लीटर क्षमता के टैंक बनाने में करीब 14 हजार रुपये की लागत आई। इस टैंक के पानी से पीने के अलावा शेष दूसरे काम किए जाते हैं। इस पानी से लोगों का दो-तीन दिन तक काम चल जाता है। अब यहां मोहन भंडारी, अजय प्रकाश जोशी, दीवान नाथ, पान सिंह, राम सिंह सहित 30 से अधिक ग्रामीणों ने टैंक बनाए हैं। कई दिनों से बारिश नहीं होने से फिलहाल ज्यादातर टैंक खाली हैं।