लगातार सूखा पड़ने के कारण लोग भविष्य के प्रति अनिश्चित हो गए हैं। अब उन्होंने देवी-देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना करने का क्रम शुरू कर दिया है। बाराहीधाम देवीधुरा में मां वज्र बाराही का घी का कंबल उतारने के बाद यहां चार खाम सात थोक के लोगों ने डेढ़ किमी दूर खीर गंगा और भगवती नौले से जल लाकर शक्ति में जलधारा दी।
इससे पहले सभी ने आचार्य गिरजा प्रसाद जोशी के पुरोहित्य में पूजा-अर्चना की। पुजारी महेश ने सभी को आशीर्वाद दिया। इसी के साथ मां के चरणों में जल भरने का क्रम शुरू हुआ। मान्यता है कि मां वज्र बाराही की गब्यूरी में निष्ठा और श्रद्धा के साथ यदि जल भरा जाता है तो मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इससे पहले जब भी अवर्षण की स्थिति पैदा हुई है, लोग मां बाराही के दरबार में इसी प्रकार वर्षा होने की कामना करते हुए अनुष्ठान करते हैं।
इस कार्य में माहरा गांव के शेर सिंह माहरा, उमेद सिंह, हर सिंह, ध्यान सिंह त्रिलोक सिंह, विरेंद्र लमगड़िया, त्रिलोक सिंह बिष्ट, गंगा सिंह चम्याल, बद्री सिंह बिष्ट, चतुर सिंह, हरिदत्त पुजारी आदि शामिल हुए। लोक परंपरा के अनुसार माघ मास में मां बाराही को घी के कंबल से ढका जाता है। इस दौरान गब्यूरी में जलधारा नहीं दी जाती है। घी का कंबल हटाने के बाद इस वर्ष वर्षा होने के लिए लोगों ने सामूहिक रूप से जलधारा दी।