माता-पिता से दूर रुद्रपुर में घर में फंसे तीन नाबालिग भाई-बहिन।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। कोरोना वायरस के खतरों के बीच चंपावत में पहला क्वारंटीन हुआ है। इन 19 यात्रियों को संस्थागत क्वारंटीन किया गया है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने बताया कि परीक्षण में स्वस्थ पाए जाने के बावजूद एहतियातन इन यात्रियों को चंपावत के अलग-अलग होटलों में रखा गया है।
दिल्ली में फंसे रोडवेज की बस के जरिये पहाड़ के इन यात्रियों को शुक्रवार दोपहर यहां लाया गया। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक आरके जोशी ने बताया कि स्क्रीनिंग में सभी यात्रियों का तापक्रम सामान्य था। लेकिन एहतियातन इन सभी 19 यात्रियों को चंपावत के होटलों में 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया गया है। इसके अलावा पिथौरागढ़ जिले के रहने वाले 5 अन्य लोगों को पिथौरागढ़ के लिए भेज दिया गया है। इन लोगों को पिथौरागढ़ में क्वारंटीन किया जाएगा।
20 मार्च से माता-पिता से दूर हैं नाबालिग बच्चे
चंपावत। रुद्रपुर में सिडकुल में ड्राइविंग करने वाले लोहाघाट क्षेत्र के किशोर ओली के तीन बच्चे अपने माता-पिता से दूर हैं। परिवार में बुजुर्ग की मौत होने पर किशोर अपनी पत्नी के साथ 20 मार्च को लोहाघाट के सुई गांव में आ गए। बच्ची की हाईस्कूल बोर्ड की परीक्षा थी, इसके चलते तीनों नाबालिग बच्चे अंकित, सपना व पूजा रुद्रपुर में ही रुक गए। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और उसके बाद से लगातार लॉकडाउन से बच्चे रुद्रपुर में कमरों में कैद हैं।
उनके पड़ोसी भी अपने-अपने घर जा चुके हैं। पूरी तरह अकेले रह जाने से माता-पिता को बच्चों की चिंता सता रही है। वहीं हरियाणा के पानीपत में कैलाश सिंह, सूरज सिंह, राकेश सिंह, लक्ष्मण सिंह, वीरेंद्र सिंह, कमल सिंह, यशपाल सिंह, प्रकाश सिंह सहित पहाड़ के कई नौजवान फंसे हुए हैं। इन युवकों का कहना है कि उन्हें रोडवेज बसों के जरिये उनके घर पहुंचाया जाए।