टनकपुर (चंपावत)। पूर्णागिरि मेले में चौथे दिन श्रद्धालुओं की आवक कम रही। पिछले 24 घंटे में करीब आठ हजार भक्तों ने देवी मां दर्शन किए। मेले में दूसरे और तीसरे दिन की अपेक्षा चौथे दिन श्रद्धालुओं की आवक करीब 68 फीसदी तक कम रही।
होली के अगले दिन यानी 30 मार्च से शुरू हुए पूर्णागिरि मेले में यूपी के पीलीभीत, नवाबगंज, बरेली, शाहजहांपुर, बदायूं, कासगंज, पूरनपुर, अलीगढ़, सीतापुर, लखनऊ, मुरादाबाद, गोंडा, लखीमपुर, खीरी आदि स्थानों से बड़ी संख्या में आ रहे हैं। पर्याप्त संख्या में ट्रेनों के नहीं चलने से श्रद्धालुओं को काफी परेशानी हो रही है।
टनकपुर से बरेली के लिए संचालित एक पैसेंजर ट्रेन और दिल्ली के लिए चल रही जन शताब्दी एक्सप्रेस से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इसके अलावा रोडवेज की बसों, निजी साधनों, बाइक और साइकिलों से भी भक्तों की टोलियां आ रही हैं। पूर्णागिरि मेले में पहले दिन 15 हजार, दूसरे और तीसरे दिन 25-25 श्रद्धालुओं ने देवी मां के दर्शन किए थे। शुक्रवार को चौथे दिन करीब आठ हजार भक्तों देवी मां के दर्शन किए। मंदिर समिति अध्यक्ष पं. भुवन चंद्र पांडेय के अनुसार कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सरकार की ओर से एक अप्रैल से लागू एसओपी के कारण भी श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई है।
सुरक्षा व्यवस्था में हुआ सुधार
पूर्णागिरि मेले की सुरक्षा व्यवस्था काफी हद तक पटरी पर आ गई है। धाम के अलावा शहर मेला क्षेत्र और स्नानघाटों पर पुलिस कर्मी तैनात नजर आने लगे हैं। सीओ अविनाश वर्मा ने बताया कि बाहरी जिलों से मांगा गया ज्यादातर फोर्स पहुंच चुका है। जरूरी स्थानों पर पुलिस कर्मी तैनात कर दिए गए हैं।
दुरुस्त नहीं हो पाई जलापूर्ति व्यवस्था
गर्मी की तपिश बढ़ने के साथ ही मेला क्षेत्र में पानी की समस्या पैदा होने के आसार बढ़ने लगे हैं। जल संस्थान भी पानी की व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं है। विभाग ने अब तक न तो जलापूर्ति का रोस्टर तय किया है और न ही ठेकेदार ने पर्याप्त कर्मचारी तैनात किए हैं। इससे दुकानों और धर्मशालाओं के साथ ही यात्रियों को भी पानी की समस्या से झेलनी पड़ रही है।
मेला प्रशासन की आय का बड़ा स्रोत है मुंडन संस्कार
टनकपुर (चंपावत)। पूर्णागिरि मेले में बच्चों का मुंडन संस्कार मेला प्रशासन की आय का बड़ा स्रोत है। श्रद्धालु भी पूर्णागिरि धाम में बच्चों का मुंडन संस्कार कराना शुभ मानते हैं, लेकिन इस बार भी कोरोना की वजह से मुंडन संस्कार होंगे या नहीं इस पर संशय है। दरअसल सरकार की ओर से जारी एसओपी में बुजुर्गों, बीमार और बच्चों को मेले में नहीं लाने की सलाह दी गई है। ऐसे में मुंडन कारोबार पर असर पड़ना तय है।
अटूट आस्था और श्रद्धा के केंद्र मां पूर्णागिरि धाम को पुत्र प्राप्ति के लिए भी प्रसिद्ध माना जाता है। धाम में स्थापित झूठे का मंदिर पुत्र प्राप्ति की ही गाथा का प्रतीक है। यही वजह है कि पुत्र प्राप्ति के लिए भक्त देवी मां के दर्शन के लिए आते हैं। देवी मां की कृपा से पुत्र प्राप्त होने पर श्रद्धालु मन्नत के अनुरूप चढ़ावे के साथ बच्चों का मुंडन भी यहीं कराते हैं। धीरे-धीरे आस्था बढ़ी तो मुंडन संस्कार भी मेला समिति की आय का बड़ा स्रोत बन गया। इससे हुई आय मेले की व्यवस्था पर ही खर्च होती है। इस बार मुंडन का ठेका 72.2 लाख रुपये में आवंटित हुआ है। (संवाद)
कोरोना को लेकर जारी एसओपी में सरकार ने मेले में बुजुर्ग और बच्चों को लाने पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, बल्कि सलाह दी है कि 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग, बीमार और दस साल से कम उम्र के बच्चों को अनावश्यक रूप से मेले में न लाएं। यदि श्रद्धालु बुजुर्गों और बच्चों को लेकर आते हैं तो उन्हें रोका नहीं जाएगा। कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करने की सलाह देते हुए दर्शन के लिए भेजा जाएगा। -हिमांशु कफल्टिया, मेला मजिस्ट्रेट, एसडीएम पूर्णागिरि।
मां पूर्णागिरि धाम के दर्शन कर लौटते उत्साहित युवाओं की टोली।- फोटो : TANAKPUR
मां पूर्णागिरि धाम में घंटे बजाकर देवी मां की आराधना करते श्रद्घालु।- फोटो : TANAKPUR
नेपाल के ब्रह्मदेव स्थित बाबा सिद्घनाथ मंदिर में दर्शन के लिए खड़े पूर्णागिरि धाम आए श्रद्घालु।- फोटो : TANAKPUR