प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के स्वयं सेवकों ने रविवार और अन्य अवकाश का मानदेय काटे जाने के आदेश का विरोध किया है। इस बावत उन्होंने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। प्रभारी मंत्री को ज्ञापन देकर पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग उठाई।
पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग को लेकर शनिवार को पीआरडी जवानों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि जिले में 289 महिला और पुरुष पीआरडी स्वयं सेवक पंजीकृत हैं। इनमें से 160 स्वयं सेवक विभिन्न विभागों मे तैनात हैं। जिनको विभागीय और गैर विभागीय मद से मानदेय दिया जाता है। स्वयं सेवकों का कहना है कि बीते पांच सितंबर को मुख्य विकास अधिकारी ने सभी कार्यालयों को पत्र लिख पीआरडी जवानों को रविवार और अन्य अवकाश का मानदेय काटने के निर्देश दिए हैं।
स्वयं सेवकों का कहना है कि वे पहले से ही बेहद कम मानदेय में काम कर रहे हैं। अब रविवार व अन्य अवकाश का मानदेय काटे जाने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। पुरानी व्यवस्था बहाल रखे जाने को पीआरडी स्वयं सेवकों ने प्रभारी मंत्री को ज्ञापन सौंपा। प्रभारी मंत्री ने स्वयं सेवकों की समस्याओं का समाधान करने का भरोसा दिलाया है। प्रदर्शन करने वालों में रमेश जोशी, महेश कुमार, खिलानंद भट्ट, सुरेश पांडेय, हीरा गिरी, अनीता देवी, पुष्पा देवी, जगदीश राम, महेश राम, मोहन राम, निर्मला जोशी, जीवंती कार्की, निर्मल कुमार, दिलेराम शामिल थे।
हर माह दो हजार रुपये का नुकसान होगा
चंपावत। रविवार और अन्य अवकाशों का मानदेय कटने से पीआरडी जवानों को हर माह दो हजार रुपये का नुकसान होगा। संगठन के जिला सचिव रमेश जोशी का कहना है कि उन्हें चार सौ रुपये रोज वेतन मिलता है। अन्य जिलों के पीआरडी जवानों को पूरे माह का वेतन मिल रहा है। माह में चार रविवार और एक द्वितीय शनिवार के अवकाश का मानदेय कटने से कम से कम दो हजार रुपये महीने का नुकसान होगा।