चंपावत। आंखों में धूल झोंकने की इससे बड़ी बात और क्या होगी कि 132 केवी की पिथौरागढ़-लोहाघाट-चंपावत पारेषण लाइन का काम अभी पूरा भी नहीं हुआ और पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के अधिकारियों ने इस अधूरी परियोजना का लोकार्पण 12 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पिथौरागढ़ से करवा दिया। स्थिति यह है कि यहां अभी न तो बिजलीघर बना है और न ही स्टाफ की तैनाती हुई है। 132 केवी विद्युत उपसंस्थान लोहाघाट की बुधवार को जमीनी पड़ताल करने पर यह तस्वीर सामने आई।
उपसंस्थान के मुख्य द्वार पर ताला लटका है। कोई स्टाफ नहीं। पिथौरागढ़ से लोहाघाट के बीच 42 किमी लंबी लाइन को 158 टावर के जरिये जोड़ा गया है। पिटकुल की 82.07 करोड़ रुपये की इस लाइन से 132 केवी बिजली की आपूर्ति नहीं हो रही है। इस नई लाइन से अभी सिर्फ 25 प्रतिशत यानी 33 केवी बिजली ही मिल रही है। लोहाघाट उपसंस्थान की चहारदीवारी तो बनी है लेकिन बिजलीघर भवन का काम अभी शुरू तक नहीं हुआ है। फरवरी 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और मौजूदा सांसद डॉ. रमेश चंद्र पोखरियाल निशंक ने चंपावत के दौरे के दौरान 132 केवी उपसंस्थान के निर्माण का एलान किया था। लोहाघाट के डेसली गांव में यह उपसंस्थान अभी पूरा नहीं हुआ है। संवाद
परियोजना से ये लाभ होंगे
- लो-वोल्टेज से निजात मिलेगी
- ब्रेक डाउन नहीं लेना पड़ेगा
- लाइन लॉस में कमी आएगी
- चंपावत जिले के सवा दो लाख से अधिक आबादी वाले समूचे पहाड़ी क्षेत्र पाटी, बाराकोट, लोहाघाट का संपूर्ण ब्लॉक क्षेत्र के अलावा चंपावत ब्लॉक का समूचा पहाड़ी हिस्सा लाभान्वित होगा।
- अभी मैदानी क्षेत्र टनकपुर की आपूर्ति लोहियाहेड और समूचे पहाड़ी हिस्सों की बिजली आपूर्ति
इस लाइन से 33 केवी की बिजली आपूर्ति हो रही है
132/33 केवी पारेषण लाइन और बिजलीघर दोनों अलग-अलग काम हैं। पारेषण का काम पूरा हो गया है। बिजलीघर के लिए पिटकुल की निविदा प्रक्रिया चल रही है। पिथौरागढ़ के बजाय वर्तमान में इस लाइन से 33 केवी की बिजली आपूर्ति हो रही है। इससे ब्रेकडाउन के खतरे कम होंगे। पूरी क्षमता की बिजली आपूर्ति दोनों काम पूरा होने के बाद होगी।
-उमाकांत चतुर्वेदी, ईई, ऊर्जा निगम, चंपावत।
कोट
प्रधानमंत्री ने 42 किमी लंबी विद्युत पारेषण लाइन का लोकार्पण किया है, विद्युत सब स्टेशन का नहीं। जब तक सब स्टेशन बनेगा, तब तक स्थानीय स्तर पर लॉ वोल्टेज, लाइन ट्रिपिंग की समस्या के समाधान के लिए इसे 33 केवी पर ऊर्जीकृत किया गया है। सब स्टेशन के लिए टेंडर खोला गया है। अधूरे प्रोजेक्ट के लोकार्पण की बात गलत है। -पीसी ध्यानी, प्रबंध निदेशक, पिटकुल