चंपावत। टनकपुर-चंपावत एनएच पर खटकना पुल से लेकर कोतवाली तक बने गड्ढे दुर्घटनाओं को दावत दे रहे हैं। इससे आवाजाही करने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गैस ऑफिस के समीप, वन विभाग कार्यालय, सेना कैंप के समीप बने गड्ढे लोगों के लिए मुसीबत बने हैं। हर वाहन इन गड्ढों से बचकर चलता है, लेकिन एनएच पर दबाव अधिक होने पर कई बार वाहनों को इन गड्ढों से ही निकालना पड़ता है। सबसे अधिक दिक्कत दोपहिया वाहन चालकों को होती। अस्पताल के समीप बने गड्ढे मरीजों के लिए भी मुसीबत पैदा कर रहे हैं।
बता दें कि वर्तमान में जिले में ठंड बढ़नी शुरू हो गई है। ऐसे में कोहरे और खराब मौसम में अक्सर हादसे की अधिक संभावना रहती है। वाहनों को अचानक मोड़ना पड़ता है। इससे अनियंत्रित होकर वाहन गिरने का खतरा बना रहता है। एनएच पर हर रोज टनकपुर, खटीमा, दिल्ली, देहरादून सहित मैदानी इलाकों को सैकड़ों लोग आवाजाही करते हैं, लेकिन एनएच पर बने इस गड्ढे से हमेशा खतरा बना रहता है। इसमें दोपहिया वाहनों के भी फिसलने का डर रहता है। एनएच के ईई दीपक जोशी ने बताया कि विभाग की ओर से बरसात के बाद एनएच के अधिकांश गड्ढों को भरा गया था। शेष गड्ढों को भी भरा जाएगा।
पानी लीकेज भी बन रगी मुसीबत
चंपावत। एनएच पर टीआरसी और अस्पताल के समीप सड़क के बीचों बीच पानी लीकेज भी मुसीबत बनी है। लगातार बह रहे पानी से दोनों स्थानों पर वाहन चालकों के लिए गड्ढे देख पाना आसान नहीं होता है। ऐसे में दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
सड़क पर बने गड्ढों से दोपहिया वाहनों के गिरने का खतरा बना रहता है। एनएच पर मोड़ के पास बने गड्ढे में पानी भी भर जाता है। इससे दोपहिया वाहन के गिरने की संभावना बनी रहती है। कार और टैक्सी भी मोड़ पर गड्ढे के कारण कई बार अनियंत्रित हो जाती है। - हेम शर्मा, वाहन चालक
एनएच पर बने गड्ढों को जल्द भरा जाना चाहिए। इससे दुर्घटना होने से बच जाएगी। एनएच पर मोड़ पर बने इस गड्ढे से कई बार दोपहिया वाहन गिरते-गिरते बचे हैं। एनएच के गड्ढे लोगों के लिए सिरदर्द बन गए हैं। - राहुल, स्थानीय