चंपावत ब्लॉक में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए मतदान निपटने के बाद रविवार शाम साढ़े तीन बजे सभी 141 पोलिंग पार्टियां वापस आ गईं। अधिक दूरी के चलते सबसे पहले 3 अक्तूबर को मतदान केंद्रों के लिए गईं 9 पोलिंग पार्टियां सबसे आखिर में पहुंची।
कुलेठी की पहली मतदान टीम शनिवार शाम 6.55 बजे ब्लॉक में बने स्ट्रांग रूम में पहुंची। डांडा मल्ला की आखिरी टीम 20 घंटे से अधिक वक्त के बाद रविवार शाम 3.30 बजे बाद पहुंची। जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र नारायण पांडेय ने बताया कि सभी मतपेटियां तगड़ी हिफाजत के बीच स्ट्रांग रूम में रख दी गई हैं। स्ट्रांग रूम को प्रेक्षक हरीश चंद्र कांडपाल की मौजूदगी में सील किया गया। मतगणना 21 अक्तूबर को होगी।
शनिवार को मतदान संपन्न होने के बाद पोलिंग पार्टियों का चंपावत ब्लाक मुख्यालय में पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। सबसे पहले शनिवार को कुलेठी, पुनेठी, लटोली, सिलिंटाक, ढकना, बडोला, डूंगरासेठी, चौड़ा राजपुरा की पोलिंग पार्टियां ब्लॉक कार्यालय पहुंची। चंपावत ब्लाक के मैदानी क्षेत्र टनकपुर, बनबसा और दूरस्थ क्षेत्रों से रात भर पोलिंग पार्टियों का चंपावत ब्लॉक मुख्यालय में पहुंचने का सिलसिला चलता रहा।
चंपावत ब्लॉक के निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र डुंगरियाल ने बताया कि रविवार शाम को सभी 141 पोलिंग पार्टियां ब्लॉक मुख्यालय में पहुंच गई है। खिरद्वारी, बकौड़ा, आमनी, तरकुली, ककनई, गंगसीर, रियासी बमन, सौराई और डांडा मल्ला की टीम सबसे अंत में पहुंचने वाली टीमें थीं।
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त्रिस्तरीय पंचायती चुनावों में पुरुषों से 13.50 प्रतिशत ज्यादा वोट किया
चंपावत। नवरात्र की सप्तमी के दिन शनिवार को हुए त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव में महिलाओं ने एक बार फिर पुरुषों को काफी पीछे छोड़ दिया। पहले घर का काम निपटाने के बाद उन्होंने मतदान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।
नतीजा यह है कि महिलाओं की कम संख्या होने के बावजूूद उन्होंने मतदान में पुरुषों को न केवल प्रतिशत में बल्कि मतदान करने वालों की संख्या में भी पछाड़ दिया। चंपावत ब्लाक की महिलाओं ने पुरुषों की अपेक्षा 2823 (13.50 प्रतिशत) अधिक वोट कर जागरूकता का प्रदर्शन किया है।
चंपावत ब्लाक में कुल 67035 वोटर हैं। इसमें से कुल 48727 (72.69 प्रतिशत) वोट पड़े। 34683 पुरुषों में से सिर्फ 22952 (66.17 प्रतिशत) ने वोट डाला। वहीं 32352 महिलाओं में से 25775 (79.67 प्रतिशत) ने मतदान किया।
महिलाओं के अधिक मतदान करने की वजह से जून 2014 में हुए पंचायत चुनाव से अधिक मत प्रतिशत हो सका। पिछले पंचायती चुनाव में 71.65 प्रतिशत मदान हुआ था। महिलाओं का कहना है कि वे पंचायतों के जरिए ग्रामीण विकास को गति देने के लिए मतदान को आगे आई हैं।
लोकसभा और शहरी चुनाव में भी आगे रही थीं महिला मतदाता
चंपावत। घर-गृहस्थी संभालने वाली महिलाएं सियासत की भी बेहतर समझ रखती है, ये महिलाओं ने मताधिकार के प्रति उत्साह दिखा पहले भी दर्शाया है। नवंबर 2018 में हुए नगर निकाय चुनावों में भी महिलाएं मतदान में पुरुषों से आगे रही थीं। चंपावत जिले में महिलाओं ने पुरुषों की अपेक्षा 4.26 प्रतिशत ज्यादा वोट डाले थे। तब 29459 वोटरों में 71.57 प्रतिशत (21084) ने वोट डाले थे।
15107 पुरुषों में से 10499 (69.49 प्रतिशत) और 14352 में से 10585 (73.75 प्रतिशत) महिलाओं ने मत डाले। इसी साल अप्रैल मेें हुए लोकसभा चुनाव में भी महिलाओं ने चंपावत जिले में 12.18 प्रतिशत अधिक वोट किया था। 94055 पुरुषों में से मात्र 51195 (54.93 प्रतिशत) और 85226 महिलाओं में से 57202 (67.11 प्रतिशत) महिलाओं ने वोट डाला।
पल्सों में सर्वाधिक, बिरगुल में सबसे कम मतदान
चंपावत। चंपावत ब्लाक में पंचायती चुनाव में इस बार कुल 72.69 प्रतिशत वोट पड़ा। 67035 वोटरों में से 48727 ने मतदान किया। ये मत प्रतिशत पिछले पंचायती चुनाव से 1.04 प्रतिशत ज्यादा है। इस बार सर्वाधिक 91.05 प्रतिशत मतदान पल्सों के बूथ में हुआ। यहां 458 मतदाताओं में से 417 ने मतदान किया। जबकि सबसे कम 51.64 प्रतिशत वोट बिरगुल के बूथ नंबर दो में पड़े। यहां 304 में से महज 157 लोगों ने मतदान किया।
जीत-हार की कयासबाजी भी शुरू
चंपावत। त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव के मतदान को अभी एक दिन भी नहीं बीता कि जीत-हार के कयास भी शुरू हो गए। रविवार सुबह से ही कई प्रत्याशी और उनके समर्थक तमाम महत्वपूर्ण सीटों पर लोगों के रुझान और अन्य स्रोतों से मिली जानकारी के हिसाब से जीत-हार का गणित लगा रहे हैं। यहां तक कि कई ब्लाक प्रमुखी के दावेदारों की हार का भी अंदेशा जताया जा रहा है।