जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अब ग्रामीण राजनीति से अपरिचित चेहरे पहली बार नेतृत्व की बागडोर संभालेंगे। आरक्षण के रोस्टर के साथ ही दो संतान और शैक्षिक योग्यता की अनिवार्यता के चलते जहां विभिन्न विकासखंडों में राजनीति के परंपरागत धुरंधर अधिसूचना जारी होने से पहले ही चुनावी दौड़ से बाहर हो चुके हैं। वहीं नए उभर कर आने वाले युवा चेहरे किसी भी राजनैतिक पार्टी के लिए भविष्य की राजनीति का चेहरा बन सकते हैं।
लंबे समय से पंचायत चुनाव के विभिन्न पदों पर चुनावी वैतरणी पार करने के लिए सभी तरह के हथकंडों को अपना रहे राजनैतिक धुरंधरों की आशाओं में राज्य सरकार की ओर से लाए गए नए पंचायतीराज एक्ट के प्रावधानों ने तुषारापात किया।
वहीं रही सही कसक पंचायती सीटों पर आरक्षण के रोस्टर ने पूरी कर दी। ऐसे में जिला पंचायत सदस्यों के साथ ही चारों विकासखंडों में ब्लॉक प्रमुख पदों के लिए परंपरागत धुरंधर चुनावी दौड़ से बाहर हो गए हैं। अब सभी स्थानों में नए युवा विभिन्न पदों की दावेदारी कर रहे हैं जिससे तय है कि जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी और ग्राम प्रधान पदों पर पहली दफा युवा चेहरे ही नेतृत्व की बागडोर संभालेंगे।
जिला पंचायत के रण में इंजीनियर कूदे मैदान में
चंपावत। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है। इस बार पंचायत चुनाव में युवा बढ़चढ़ कर भाग ले रहे हैं। अपनी मोटी तनख्वाह वाली नौकरी छोड़ एक 25 वर्षीय युवक फरतोला सीट से जिला पंचायत सदस्य के लिए मैदान में उतर गए हैं। खोला सुनार रिवासी कमलेश जोशी मारुति कंपनी रुद्रपुर में जूनियर एक्जक्यूटिव इंजीनियर थे। वह चार माह पहले इस्तीफा देकर चुनावी तैयारी में जुट गए हैं।
कमलेश ने देहरादून के ग्राफिक ऐरा हिल यूनिवर्सिटी से वर्ष 2016 में मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की उसके बाद रुद्रपुर मारुति कंपनी में नौकरी करने लगे। कमलेश ने बताया कि जब कभी वह अपने गांव खोला सुनार आते थे तो विकास कार्यों और क्षेत्र की समस्या को देखकर दुखी होते थे। उनका कहना है कि अभी क्षेत्र के बहुत से गांवों में सड़क, बिजली पानी जैसी मूलभूत समस्याएं हैं जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है।