चंपावत में सांस्कृतिक चेतना मंच की काव्य गोष्ठी
- फोटो : अमर उजाला
सांस्कृतिक चेतना मंच के तत्वावधान में हुई काव्य गोष्ठी में मौजूदा दौर से लेकर विभिन्न विषयों पर कटाक्ष किए गए। जीआईसी के प्रवक्ता डा.कीर्तिबल्लभ सक्टा ने वर्तमान हालात पर ये कटाक्ष किया-दशा देश की देख अरे अब लगता है डर, नेता हुए अनेक बना उनका दल हर घर। रिटायर्ड प्रधानाचार्य डा.तिलक राज जोशी ने कहा-देश-देश में जाति-जाति में, धर्म बदल जाते हैं, बात-बात में मानव-मानव बात बदलते जाते हैं।
जनकवि डा.प्रकाश चंद्र जोशी शूल ने नशाखोरी के खिलाफ ऐसे जागरण किया-शराब तंबाकू बीड़ी गुटखा शरीर के हैं दुश्मन, त्वरित त्यागने को इन्हें शूल देता है तुमको सम्मन। पीजी कॉलेज के रिटायर्ड प्राचार्य डा.डीडी जोशी ने कहा-जाति धर्म और संस्कारों पर हर कोई करता है चर्चा, टीवी और मोबाइल पर भी हर कोई करता है चर्चा, डा.भुवन चंद्र जोशी ने कहा-कब से जलाते आ रहे रावण-वह जलता नहीं, विडंबना कैसे न जाने रावण कभी मरता नहीं, सुभाष जोशी ने ये कहा-कुछ हंसता, कुछ रोता जीवन, कुछ खोता, कुछ पाता जीवन सुनाई, अंजू पांडेय ने ये कविता पेश की-काल चक्र चल पड़ा, झूठ क पुलिंदा बना, राह सरे बिक रहा, बुद्धि कंगाल हुई।
राम प्रसाद आर्य, पुष्कर सिंह बोहरा, बबीता जोशी, कमला जोशी, डा.विष्णु दत्त भट्ट सरल, नेहा पंत, डा.सतीश पांडेय ने भी कविता पाठ किया। इस मौके पर संजय बोहरा, नीरज जोशी, चंपात जोशी आदि मौजूद थे। गोष्ठी के अंत में मंच के सदस्य और पशुधन प्रसार अधिकारी हिमांशु जोशी की मां के निधन पर शोक जताया गया।