उत्तर भारत के प्रसिद्ध पूर्णागिरि मेले में देवी के दर्शन को देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही बनी हुई है। निजी वाहनों के साथ ही भक्तों की टोलियां मां के डोले के साथ कई किमी. की पैदल यात्रा कर देवी के दर्शन को पहुंच रही है। श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही से समूचे क्षेत्र में माहौल भक्तिमय है।
14 मार्च से शुरू हुए मेले में दिन-रात यात्रियों की आवाजाही हो रही है। उत्तराखंड और यूपी में बोर्ड परीक्षाओं के शुरू होने से इन दिनों श्रद्धालुओं की आवक कम हो गई है। मेला प्रशासन के मुताबिक 24 घंटे में करीब 15 हजार भक्तों ने मां के दरबार में शीश नवाए। हर दिन श्रद्धालुओं की दर्जनों टोलियां पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर आदि जिलों से भक्तिगीतों में थिरकते हुए कई किलोमीटर की पैदल यात्रा तय कर दर्शन को पहुंच रही है। रविवार को देव स्थान मंदिर पुवांया शाहजहांपुर से भक्ति की टोली मां के डोले के साथ पैदल यहां पहुंची। टोली के मुखिया रामलडैत राठौर ने बताया कि उनकी टोली 16 मार्च की सुबह देव स्थल मंदिर पुवांया से पैदल रवाना हुई और चार दिन बाद टनकपुर पहुंची है। मां के डोले के साथ भक्तिगीतों पर शिव-पार्वती व राधा-कृष्ण के वेश में नृत्य करते कलाकार सभी के आकर्षण का केंद्र थे। टोली में रामनिवास, आनंद किशोर, ओमप्रकाश, कल्लू राठौर, रामू, मुकेश पप्पू, राम प्रकाश, सुरेंद्र आदि शामिल थे।