बढ़ती गर्मी के साथ ही जिले में पेयजल संकट बढ़ता जा रहा है। नगरीय क्षेत्रों में जल संस्थान की ओर से पिकअप और टैंकरों से जलापूर्ति का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन यह प्रयास न काफी पड़ रहे हैं। प्राकृतिक जल स्रोतों के जल स्तर में लगातार गिरावट के कारण लोगों को कई-कई किमी दूर की यात्रा कर पेयजल जुटाना पड़ रहा है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता पीसी करगेती का कहना है कि यदि जल्द ही बारिश नहीं हुई तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
उधर, बाराकोट मे पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है। लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं। यहां के नौलों, धारों के अलावा पेयजल योजनाओं के जल स्रोतों में भारी कमी आने लगी है। पम्दा, बाराकोट, काकड, फरतोला गांवों में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। गंभीर पेयजल संकट को देखते हुए लक्ष्मण राम विश्वकर्मा ने निजी संसाधनों से बाराकोट में 10 हजार लीटर तथा पम्दा में पांच हजार लीटर पेयजल उपलब्ध कराया गया। ग्राम प्रधान भगवानदास जोशी, प्रकाश अधिकारी, नगेंद्र जोशी, अर्जुन नाथ, मदन मोहन जोशी और अभियंता किशोर पंत ने सलना-पम्दा पेयजल योजना के स्रोत का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया कि स्रोत का जल स्तर रसातल में पहुंच गया है। जल संस्थान की ओर से पिकअप के जरिए जलापूर्ति शुरू कर दी गई है। लोग सुबह से ही पानी का पिकअप आने की इंतजारी में बर्तनों को लेकर लाइन लगा रहे है।
टुल्लू पंपों पर लगाई जाए रोक
चंपावत। नगर के त्यारकूड़ा मोहल्ले में बीते एक सप्ताह से पेयजल संकट के चलते नागरिकों में रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि त्यारकूड़ा पेयजल योजना में पर्याप्त पानी उपलब्ध है, लेकिन सप्लाई के समय प्रभावशाली लोगों की ओर से टुल्लू पंप लगाने के कारण लोगों को पानी नहीं मिल रहा है। नवीन चंद्र तिवारी, नेत्र बल्लभ तिवारी, विजय तिवारी, अजय तिवारी आदि ने जल संस्थान और विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर टुल्लू पंपों पर रोक लगाने के साथ ही जलापूर्ति के दौरान पावर कट रखने की मांग उठाई है।