चंपावत जिले के सीमांत संगरून गांव में 28 जुलाई को मलबे से प्रभावित ग्रामीणों ने बुधवार को करीब 70 किलोमीटर की दूरी तय कर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना था कि बरसाती नाले और भू-कटाव के कारण क्षेत्र के अधिकांश मकानों की स्थिति बेहद जर्जर हो गई है।
उन्होंने डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर प्रभावित परिवारों और ग्रामीणों को अन्यत्र विस्थापित करने और मुआवजे की मांग उठाई। प्रभावित ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने आसपास के गांवों में परिचितों के यहां शरण ली हुई है।
विधायक प्रतिनिधि विपिन जोशी और युवक मंगल दल के राकेश सिंह के नेतृत्व में जिला मुख्यालय पहुंचे ग्रामीणों का कहना था कि सीमांत संगरून गांव में बारिश से सात मकानों में मलबा घुस गया था।
जिसे निकालने में एसएसबी की सीम और खेत बार्डर आउट पोस्ट के जवानों ने मदद की। इसके अलावा सीम, खेत, ब्यूरी, बकोड़ा के संगरून, बंडा में भीषण तबाही हुई है। लगातार कटाव के कारण ग्रामीणों की फसलें और उत्पादक जमीन भी बह गई है।
पूर्व में बने सारे चेकडॉम और पेयजल योजनाएं ध्वस्त होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन देने और प्रदर्शन करने वालों में हीरा सिंह, विशन सिंह, जगत सिंह, रघुवर सिंह, जगदीश सिंह, धर्म सिंह सहित सभी प्रभावित ग्रामीण मौजूद रहे।
पटवारियों की रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई
डीएम डॉ.अहमद इकबाल का कहना है कि संगरून क्षेत्र में दैवी आपदा की सूचना के बाद पटवारियों को क्षति के आंकलन के लिए भेजा गया है। जिनकी रिपोर्ट आने के बाद ही विस्थापन अथवा मुआवजा वितरण की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों की समस्या का शीघ्र समाधान करने का आश्वासन भी दिया।
एसएसबी की मदद के मुरीद हुए ग्रामीण
सीमांत संगरूर के ग्रामीण एसएसबी के जवानों और अधिकारियों के मुरीद हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि घटना के तत्काल बाद सीम और खेत चौकियों से पहुंचे जवानों ने जानवरों को सुरक्षित निकालने के साथ ही ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान में पहुंचाया। यहीं नहीं एसएसबी की ओर से ग्रामीणों को खाद्यान्न सामग्री वितरित करने के साथ अपने कैंप में शरण देकर उनका दिल जीत लिया।