चंपावत। जिला अस्पताल में चर्म रोग के मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। करीब तीन माह से चर्म रोग विशेषज्ञ अस्पताल में नहीं है। मजबूरी में लोगों को इलाज के लिए खटीमा और अन्य शहरी क्षेत्रों की ओर रुख करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ के पास रोजाना 20 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते थे, इनमें से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों के होते हैं।
खुजली, बाल गिरने, चेहरे पर दाग आदि की समस्या से जूझ रहे लोग बेहद परेशान हैं, लेकिन अब उन्हें इलाज के लिए खटीमा जाना पड़ रहा है। इसमें उनकी जेब पर भार पड़ रहा है। पूर्व में पिथौरागढ़ अस्पताल में तैनात चर्म रोग विशेषज्ञ से वह इलाज कराते थे, लेकिन उनकी तैनाती अब धारचूला कर दी गई है। ऐसे में लोगों के लिए अब चर्म रोग का इलाज मिलना मुश्किल हो गया है। कुछ लोग फिजिशियन से अपना इलाज कर रहे हैं। प्रभारी पीएमएस डॉ. पीएस बिष्ट ने बताया कि चर्म रोग विशेषज्ञ चिकित्सकीय अवकाश पर हैं। उनके आने के बाद ही लोगों का इलाज हो सकेगा।
कोट
बीमारी से ज्यादा परेशानी अब इलाज मिलने की हो गई है। चंपावत अस्पताल में चिकित्सक नहीं हैं। वहीं पिथौरागढ़ के चर्म रोग विशेषज्ञ धारचूला चले गए हैं। शरीर की खुजली परेशान कर रही हैं। फिजिशियन से इलाज कराने में आराम नहीं मिला। अब खटीमा ही आखिरी सहारा है। -गणेश दत्त भट्ट, मडलक
कोट
त्वचा रोग की बीमारी का इलाज कराना आसान नहीं है। लंबे समय से अस्पताल में चिकित्सक नहीं है। स्वास्थ्य विभाग को नए चर्म रोग विशेषज्ञ की तैनाती करनी चाहिए। हर किसी के लिए बाहर जाना संभव नहीं है। - पवन जोशी, बाराकोट