पाटी (चंपावत)। पाटी ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय जैरोली और राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय बिसारी के बच्चों और शिक्षकों को सड़क के अभाव में दो किमी पैदल चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा हैं। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग की है।
क्षेत्र के दोनों स्कूलों में रौलमेल, बिसारी, जौलाड़ी, लखनपुर, झुडेली, पूनाकोट, कीम्वाड़ी, जैरोली आदि कई गांवों के छोटे-छोटे बच्चों अध्ययनरत हैं। जंगल क्षेत्र होने के चलते अभिभावक बच्चों को विद्यालय पहुंचने और आने चिंतित रहते हैं। शिक्षकों और बच्चों को डिग्री कॉलेज पाटी से लगभग दो किमी उबड़खाबड़ रास्ते से गुजरना पड़ता है।
बरसात के दिनों में रास्ता खराब होने से कई बार बच्चे विद्यालय भी नहीं जा पाते हैं। वहीं कई बार फिसलन भरी मिट्टी में फिसलकर बच्चे चोटिल भी हो जाते हैं। विद्यालयों में निर्माण सामग्री, मध्याह्न भोजन और छात्र-छात्राओं की पुस्तकों को स्कूल तक पहुंचाने में शिक्षकों, भोजन माताओं को मुश्किल का सामना करना पड़ता है। बिसारी विद्यालय के शिक्षक रवीश पचौली का कहना है कि विद्यालय तक सड़क नहीं होने से कई बच्चे विद्यालय नहीं आ पाते हैं। वर्तमान में दोनों विद्यालयों में 80 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। उनका कहना है कि स्कूल तक सड़क होती तो छात्र संख्या भी बढ़ती।
चुनाव के दौरान बनाए जाते हैं मतदान केंद्र
इन विद्यालयों में पंचायत निर्वाचन के दो-दो बूथ भी हैं। मतदान केंद्रों तक दिव्यांगों, वृद्ध और मतदाताओं को लाने-ले जाने में ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
सड़क नहीं होने से दो किमी तक पैदल चलना पड़ता है। रास्ते में घास और बड़ी-बड़ी झाड़ियां होने से जंगली जानवरों का डर लगा रहता है। अकेले आने-जाने में हर समय भय बना रहता है। ललिता मेहता, छात्रा
पैदल मार्ग बहुत ही बदहाल है। बरसात में मार्ग पर बने गड्ढों में पानी भर जाता है। कई बार आवाजाही के दौरान गिरकर चोटिल हो जाते हैं। हर रोज स्कूल जाना एक बड़ी चुनौती होती है। - मनीक्षा, छात्रा