बागेश्वर। गर्मी के मौसम में पहाड़ों पर पेयजल संकट गहराने लगता है। इस बार बेमौसम बारिश ने कुछ समय के लिए राहत दी। अब तापमान बढ़ने के साथ जलस्रोतों का पानी घटने लगा है। जिले के धूराफाट क्षेत्र की 12 ग्राम पंचायतों में लोगों को आवश्कतानुसार पानी नहीं मिल रहा है। करीब आठ हजार की आबादी को पेयजल जुटाने के लिए हैंडपंप और प्राकृतिक स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है।
धूराफाट के गांवों को पानी मुहैया कराने के लिए वर्ष 2006 में सरयू नदी से पंपिंग पेयजल योजना बनाई गई थी। वर्तमान में योजना के पाइप जर्जर हो चुके हैं। सरयू किनारे बने पंप हाउस में लगी मशीनरी पुरानी हो चुकी है। अधिकतर स्थानों पर पाइप में लीकेज की परेशानी है। पिछले 17 वर्षों में क्षेत्र की आबादी तो बढ़ी लेकिन पेयजल योजना की क्षमता नहीं बढ़ सकी। गर्मी के दिनों में सरयू नदी का पानी कम होने से परेशानी होने लगती है। बिजली कटौती के कारण भी लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है।
गर्मी के दिनों में हर साल योजना से लाभान्वित होने वाले रैखोली, बोहाला, नंदीगांव, सिया, बौड़ी, एरियागाड़, असों, चनबौड़ी, पाना, घटगाड़ आदि गांवों के लोगों की परेशानियां बढ़ने लगती हैं। बारिश का दौर थमने के बाद क्षेत्र में पेयजल संकट गहराने लगा है। कठपुड़ियाछीना संघर्ष समिति के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह रावत और क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की है।
पहले बिजली गिरने, फिर शॉर्ट सर्किट के कारण पंप हाउस के उपकरण जलने से समस्या थी जिसे दूर कर दिया गया है। सरयू नदी में पानी कम होने से परेशानी की शिकायत अब तक नहीं मिली है। जल्द ही कर्मचारी निरीक्षण करेंगे। जलस्तर कम होगा तो पानी को पंप की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
सीएस देवड़ी, ईई, जल संस्थान, बागेश्वर।