टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर रोजाना 95 से अधिक रोडवेज की बसों की आवाजाही होती है लेकिन इस रूट पर चलने वाली बसों का लाभ अब एनएच के किनारे बसे गांवों के लोगों को नहीं मिल रहा है। इंतजार करने वाले ग्रामीणों को चकमा देकर ज्यादातर बसें आगे बढ़ जाती हैं। इससे लोगों का जरूरी काम भी प्रभावित हो रहा है। रोडवेज के इस रवैये से परेशान ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर लोकसभा चुनाव के बाद आंदोलन की चेतावनी दी है।
एनएच के किनारे बसे बनलेख, धौन, स्वांला, अमोड़ी, बेलखेत आदि गांवों के लोगों के लिए आवाजाही का सबसे बड़ा सहारा रोडवेज बसें हैं। अमूमन सीट नहीं होने से जीप, टैक्सियां और ट्रक रास्ते के यात्रियों के लिए नहीं रुकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले महीने तक गांवों के लोग रोडवेज बसों से आसानी से आवाजाही करते थे लेकिन इस माह के शुरू से रोडवेज की ज्यादातर बसें स्टॉपेज पर ग्रामीणों द्वारा रोकने का इशारा करने के बावजूद नहीं रुक रही हैं। इससे ग्रामीणों को काम के लिए जिला मुख्यालय चंपावत तक वक्त पर पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
वरिष्ठ स्टेशन प्रभारी बीसी आर्या का कहना है कि टनकपुर-लोहाघाट के बीच कुल 12 स्टॉपेज हैं। यात्रियों द्वारा बस को रोके जाने का इशारा करने पर चालक द्वारा बस को रोका जाना चाहिए। इस संबंध में सभी चालकों को निर्देश दिए जाएंगे। लिखित रूप से शिकायत किए जाने पर कार्यवाही भी की जाएगी।
टनकपुर से लोहाघाट के बीच ये हैं 12 स्टॉपेज
बस्टिया, सूखीढांग, सिन्याड़ी, चल्थी, बेलखेत, अमोड़ी, स्वांला, धौन, बनलेख, फुलारगांव, चंपावत और मानेश्वर।
एनएच पर रोडवेज बसों के नहीं रुकने से ग्रामीणों को समस्या हो रही है। बस के लिए लंबे इंतजार से जिला मुख्यालय, तहसील और ब्लॉक के काम के लिए लोगों का समय पर पहुंचना मुश्किल हो रहा है। जगदीश भट्ट पूर्व प्रधान, धौन।
-स्वांला क्षेत्र में जीप-टैक्सियां नहीं है और रोडवेज वाले बसों को चालक रोकते नहीं। इस वजह से गांव के लोगों का चंपावत तक आना कठिन हो रहा है। टीकाराम स्वांला
- एक महीने से रोडवेज की बसें एनएच किनारे बसे गांवों के लोगों के लिए अक्सर नहीं रुक रही हैं। बस चालक सीट खाली होने के बावजूद इस तरह का रवैया अपना रहे हैं। रेवाधर पूर्व फौजी।
- इस मार्ग पर बसों की कमी नहीं है लेकिन रोडवेज वाले गांव के लोगों से कन्नी काटते हैं। जितनी देर में वे बस से चंपावत पहुंच सकते हैं, उससे अधिक समय तो वाहन का इंतजार करते बीत रहा है। खिलानंद बजौन