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समय से पहले लगने लगे नाशपाती और सेब के फल

Wed, 02 Dec 2015 10:02 PM IST
सतीश जोशी ‘सत्तू’ /अमर उजाला, चंपावत
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मौसम चक्र में बदलाव का असर पर्वतीय अंचलों पर भी दिखाई देने लगा है। तापमान में हो रही लगातार बढ़ोतरी के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के फल और सिटरस फलों का समय चक्र प्रभावित होने लगा है। चंपावत जिला मुख्यालय के त्यारकूड़ा, मादली, चौकी, कुलेठी आदि स्थानों पर इन दिनों नाशपाती, सेब और आडू के फल लदने लगे हैं। तापमान के बढ़ते असर के कारण सामने आ रहे इस तरह के हैरतअंगेज मामलों को लेकर किसानों में कौतूहल का माहौल है।
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नाशपाती एवं सेब में फरवरी और मार्च में फूल आने के साथ जुलाई, अगस्त में पैदावार तैयार होती है, लेकिन इस बार चंपावत और आसपास के इलाकों का नजारा बदला हुआ है। चार माह पहले जिन नाशपाती और सेब के पेड़ों से किसानों ने उत्पादन हासिल कर लिया था, अब उन्हीं पेड़ों पर फिर से बिना फूल आए फल लदने लगे हैं। यह नजारा एक दो स्थानों पर नहीं कमोवेश सभी गांवों में दिख रहा है। हालांकि असमय आए फलों की संख्या सामान्य समय के उत्पादन की तुलना में कम है, मगर फलों के आकार और स्वाद में किसी प्रकार का अंतर नहीं है।

तापमान बढ़ने से हो रहा है असमय उत्पादन
जिला उद्यान अधिकारी हरीश चंद्र तिवारी का कहना है कि सेब और नाशपाती के उत्पादन के लिए तापमान का अनुकूल रहना जरूरी है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के असर से लगातार तापमान बढ़ रहा है, जिसका असर सेब और नाशपाती के फलों का असमय उत्पादन के रूप में सामने आ रहा है। दिसंबर में पूर्व में जहां भारी मात्रा में पाला गिरने के साथ ही तापमान में गिरावट पाई जाती थी, वर्तमान में ऐसा नहीं होने से प्रकृति नए रूप में सामने आ रही है।
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गत वर्ष की तुलना में चार डिग्री सेल्सियस का अंतर
दिसंबर में गत वर्ष की तुलना में तापमान में चार डिग्री सेल्सियस का अंतर आया है। जीआईसी के मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार गत वर्ष दो दिसंबर को जहां न्यूनतम तापमान 8.2 डिग्री और अधिकतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस था, वहीं इस वर्ष न्यूनतम तापमान 10 डिग्री और अधिकतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।
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