फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रसव के दौरान महिला और नवाजात शिशु की मौत के मामले की जांच के आदेश

विज्ञापन
मृतका सीता का पति विनोद विश्वकर्मा और उसके तीन मासूम बच्चे। - फोटो : TANAKPUR
विज्ञापन
टनकपुर (चंपावत)। संयुक्त चिकित्सालय की आउटसोर्स आया के हाथों घर में प्रसव कराने के दौरान महिला और नवजात शिशु की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त जांच के आदेश दिए हैं। सीएमओ आरपी खंडूरी ने कहा है कि प्रसव में लापरवाही से जच्चा-बच्चा की मौत होना बेहद गंभीर मामला है। जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन

शहर के वार्ड तीन आंबेडकर नगर निवासी विनोद विश्वकर्मा की पत्नी सीता (28)और उसके नवजात शिशु की संयुक्त चिकित्सालय की एक आउटसोर्स आया द्वारा घर में ही प्रसव कराने के दौरान मौत हो गई थी। प्रसव में लापरवाही से जच्चा-बच्चा की मौत की यह खबर अमर उजाला में प्रमुखता से छपने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में खासा हड़कंप मचा हुआ है। जच्चा-बच्चा की मौत के इस मामले का सरकारी अस्पताल से संबंध नहीं होने की बात कहने वाले स्वास्थ्य विभाग ने भी अब इसे गंभीरता से लिया है। सीएमओ डॉ. खंडूरी ने बताया कि प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत की घटना बहुत गंभीर मामला है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से संयुक्त जांच के आदेश दिए गए हैं। इधर एसडीएम दयानंद सरस्वती ने भी संयुक्त चिकित्सालय के सीएमएस को मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
-जांच के लिए गठित होगी गठित
प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में जांच के आदेश हुए हैं, लेकिन इसके लिए जिले से जांच टीम गठित होनी है जिसके बाद ही जांच शुरू की जाएगी। डॉ. एचएस हयांकी, सीएमएस, संयुक्त चिकित्सालय टनकपुर।
विज्ञापन

टनकपुर (चंपावत)। घर में प्रसव के दौरान पत्नी और नवजात बच्चे की मौत से विनोद विश्वकर्मा के आंसू थम नहीं रहे हैं। उसने प्रसव में लापरवाही के साथ ही सरकारी अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। उसका कहना है कि टनकपुर के सरकारी अस्पताल में वह 11 साल पहले भी धोखा खाने से बचा था, लेकिन इस बार अस्पताल की नर्स (आउटसोर्स आया) के झांसे में आकर वह पत्नी और नवजात बच्चे को गंवा बैठा। नर्स के धोखे से मिले इस दर्द को वह जिंदगी भर नहीं भूला सकता।
मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले शहर के वार्ड तीन आंबेडकर नगर कॉलोनी में किराए के मकान में रहने वाले विनोद विश्वकर्मा इस बात को लेकर काफी खुश था कि अगस्त माह में उसके आंगन में एक और खुशी की किलकारी गूंजने वाली है। लेकिन उसे क्या मालूम था कि जिस अस्पताल से उसका विश्वास उठ चुका था उसी अस्पताल की आउटसोर्स वार्ड आया के झांसे में उसकी खुशी दोहरे गम में बदलने वाली है। गत बृहस्पतिवार को गर्भवती पत्नी सीता (28) को प्रसव पीड़ा शुरू हुआ तो विनोद ने पहले से संपर्क में रही संयुक्त चिकित्सालय की आया की सलाह पर घर में ही पत्नी का प्रसव कराया। प्रसव के कुछ ही देर बाद पहले नवजात शिशु ने दम तोड़ दिया और फिर उसकी पत्नी की भी सांसेें थम गई। पत्नी की मौत से आहत विनोद अपने तीन छोटे बच्चों से लिपट कर आंसू बहा रहा है। संवाद न्यूज एजेंसी के प्रतिनिधि से वार्ता में विनोद ने बताया कि टनकपुर के सरकारी अस्पताल में वह 11 साल पहले भी धोखा खाने से बचा है। उसने बताया कि 11 साल पहले गर्भवती पत्नी की जांच कराने वह पत्नी को लेकर सरकारी अस्पताल गया तो वहां मौजूद डॉक्टर और नर्सों ने गर्भ में शिशु की मौत हो जाने की बात कहकर उसे डरा दिया था। घबराकर वह पत्नी को फौरन खटीमा के एक निजी अस्पताल ले गया था, जहां प्रसव में उसकी पहली बेटी पैदा हुई, जो आज 11 साल की हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें