सुरक्षा के मद्देनजर उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम में वर्षाकाल के दौरान दर्शन पर रोक जारी है। एसडीएम के निर्देश पर लोनिवि की टीम ने मुख्य मंदिर के समीप दरकी पहाड़ी के मलबे से बंद पड़ा रास्ता खोलने की कार्रवाई शुरू कर दी है। बहरहाल अब भी दर्शन की रस्म काली मंदिर में संपन्न कराई जा रही है।
वर्षाकाल में मां पूर्णागिरि धाम की यात्रा सुरक्षित नहीं रहती है। हाल में हुई वर्षा के दौरान काली मंदिर से ऊपर मुख्य मंदिर के समीप पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा दरक कर पैदल रास्ते में आ गिरा है, मलबे से रास्ता बंद पड़ा है। जिसके बाद सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने वर्षाकाल में दर्शन पर रोक लगाई है। एसडीएम नरेश दुर्गापाल के आदेश पर मंदिर समिति ने ताला लगाकर काली मंदिर गेट को बंद कर दिया है। एसडीएम दुर्गापाल ने बताया कि इन दिनों दर्शन को आ रहे श्रद्धालुओं को दर्शन की रस्म काली मंदिर में संपन्न कराई जा रही है।
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वहीं बारिश के दिन ककरालीगेट से आगे जाने पर रोक लगाई गई है। एसडीएम ने बताया कि लोनिवि को मुख्य मंदिर के समीप दरकी पहाड़ी का मलबा हटाकर जल्द रास्ता खोलने के निर्देश दिए गए है। इधर लोनिवि के जेई वीएस पोखरिया ने बताया कि पैदल मार्ग से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है।
बड़े-बड़े पत्थर और भारी मलबा होने से रास्ता खोलने में अभी दो-तीन दिन और लगेंगे। मंदिर समिति अध्यक्ष किशन तिवारी का कहना है कि बारिश के दौरान भैरव मंदिर से ऊपर कभी भी भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। ऐसे में श्रद्धालुओं का दर्शन के लिए आना जोखिम का काम है।