चंपावत। कोविड की दूसरी लहर का मुकाबला करने के लिए चंपावत जिले में डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर (डीसीएचसी) और कोविड केयर सेंटर (सीसीसी) बनाए गए हैं। कोविड के इलाज में किसी तरह की कमी न हो, इसके चलते चंपावत जिला अस्पताल में ओपीडी (वाह्य रोगी विभाग) भी बंद है। ओपीडी के बंद होने से लोगों के समक्ष कोरोना को छोड़ दूसरे रोगों के इलाज में दुश्वारी आ रही है। कई लोगों ने ओपीडी बंद होने पर इलाज का वैकल्पिक उपाय करने का आग्रह किया है।
कपिल की कमर की नस एकाएक चढ़ गई। वह जिला अस्पताल गए, तो पता चला कि ओपीडी बंद है। मायूस लौटे कपिल ने बाद में फोन के जरिये चिकित्सकीय परामर्श लिया। पहली मई से ओपीडी को बंद किए जाने के बाद से ऐसी दिक्कत कई दूसरे लोगों को भी आ रही है। कई लोग इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने के बाद मायूस लौट रहे हैं।
चंपावत क्षेत्र में रोजाना करीब दो सौ लोग ओपीडी में आते हैं। पहली मई से ओपीडी को बंद किए जाने से जिला अस्पताल में उन्हें ये इलाज नहीं मिल पा रहा है। इससे हृदय रोग, मधुमेह, बीपी, यूरिक एसिड सहित तमाम रोगों का इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. आरके जोशी ने कहा कि कोविड के बेहतर इलाज के चलते पहली मई से ओपीडी बंद की गई है। फिलहाल आपातकालीन सेवा के अलावा फ्लू क्लीनिक कोविड जांच और इलाज की सेवाएं होंगी।
लोहाघाट में चैनल के दूसरी ओर से मरीज को देख रहे डॉक्टर
चंपावत। लोहाघाट के उप जिला अस्पताल में ओपीडी जारी है, लेकिन डॉक्टर और मरीज के बीच लोहे के चैनल और प्लास्टिक की पन्नी लगाई गई। यहां कमरे के भीतर बैठे डॉक्टर कमरे के बाहर खड़े मरीज से बीमारी का हालचाल पूछ रहे हैं। उसी के आधार पर दवाएं दी जा रही है। सीएमएस डॉ. मंजीत सिंह का कहना है कि कोरोना के खतरे से बचाव के लिए ये व्यवस्था की गई है। अलबत्ता मरीज के इलाज में किसी तरह की हीलाहवाली नहीं की जा रही है। वैसे यहां इन दिनों औसतन 30 से 40 तक ओपीडी मरीज आ रहे हैं।