60 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से प्रस्तावित पंचेश्वर बांध परियोजना के लिए महज 22 लाख रुपये भारी पड़ रहे हैं। इस रकम के नहीं मिलने से मार्च 2018 से बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की गिनती पर भी रोक लग गई है। पैसा नहीं मिलने से वन विभाग ने बांध परियोजना के डूब क्षेत्र में आ रहे पेड़ों की गिनती बंद कर दी है।
पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले इलाकों में 26 दिसंबर 2017 से पेड़ों की गिनती शुरू हुई। काली कुमाऊं के वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी ने बताया कि रैघांव से शुरू कर तोलागांव, सुंगारखाल, कोठेरा, बेट्टा, नेत्र सलान, बरयूड़ी सहित डूब क्षेत्र में आने वाले 80 से 100 हेक्टेयर वन क्षेत्रों में करीब 65 हजार पेड़ों को गिना गया। अभी 350 से 400 हेक्टेयर में पेड़ गिने जाने बाकी हैं।
इस प्रकार करीब चार लाख पेड़ों में से 65 हजार में ही लाल निशान लग सके हैं। मजदूरों को दैनिक आधार पर भुगतान करना था लेकिन बांध से संबंधित कंपनी ने एक भी रुपया अब तक नहीं दिया है। जबकि पेड़ों को गिनने के लिए 22 लाख रुपये का आगणन सितंबर 2017 में ही भेज दिया गया था।
प्रभागीय वनाधिकारी केएस बिष्ट का कहना है कि पंचेश्वर बांध से संबंधित वापकोस कंपनी ने धन के भुगतान के लिए फरवरी 2018 में बैंक खाता संख्या मांगी थी लेकिन धन अब तक नहीं मिल सका है। इस कारण विभाग को गिनती रोकने को मजबूर होना पड़ा है।
वन कर्मियों की जेब से लग गए ढाई लाख
वापकोस कंपनी को पेड़ों की गिनती के लिए अग्रिम भुगतान करना था लेकिन अग्रिम भुगतान तो दूर पेड़ गिनने के एक माह बाद भी भुगतान नहीं किया गया। वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी ने बताया कि अब तक गिने गए पेड़ों के लिए लगे मजदूरों का करीब ढाई लाख रुपये का भुगतान वन कर्मियों ने खुद किया है। धन नहीं मिलने पर बाद में विभाग ने पत्र लिखने के साथ ही गिनती का काम रोक दिया।
पंचेश्वर डूब क्षेत्रों के पेड़ों की गिनती के लिए वन विभाग ने 22 लाख रुपये की मांग की थी। इस रकम के लिए वापकोस कंपनी को कई बार लिखा जा चुका है। अब फिर से कंपनी को रिमाइंडर भेजा जाएगा ताकि डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की गिनती जल्द से जल्द पूरी की जा सके।
रणवीर सिंह चौहान, डीएम, चंपावत।