चंपावत। कभी कहा जाता था कि पह़ाड़ का पानी और जवानी पहाड़ के काम नहीं आती। वजह थी पानी धारों, गधेरों से नदियों में मिलकर मैदानों को चला जाता है। उसी तरह रोजगार नहीं होने से पहाड़ का युवा रोजगार की तलाश में मैदानों की ओर चला जाता था। अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद एक नारा दिया गया था पहाड़ के पानी और जवानी को पहाड़ के काम लाना है। इस नारे को चंपावत के दो युवाओं ने साकार किया है।
चंपावत से सात किलोमीटर दूर कांडा गांव के युवा कमलेश पांडेय और राहुल वर्मा ने पानी का प्लांट स्थापित किया है। इस साल जुलाई में शुरू किए गए इस प्लांट में हर दिन पांच हजार लीटर पानी का उत्पादन किया जा रहा है। पहाड़ी स्रोत का यह पानी न केवल शुद्ध है बल्कि बांज और कई अन्य जड़ी बूटी मिश्रित भी है। बीआईएस (भारत का राष्ट्रीय मानक संगठन) की ओर से अनुमोदित होने के बाद इस पानी को बीएनके ब्रांड से बाजार में उतारा गया है। फिलहाल 200 मिलीलीटर, आधा लीटर, एक लीटर, दो लीटर और 20 लीटर की पैकिंग की जा रही है।
चंपावत के अलावा पिथौरागढ़ जिले में मुख्य रूप से पानी की बिक्री की जा रही है। नवरात्र से इसे मैदानी क्षेत्रों में भी विस्तार करने की योजना है। पांडेय कहते हैं कि उद्योग विभाग की मदद से 1.04 करोड़ रुपये कर्ज लेकर परियोजना शुरू की। उद्योग विभाग के महाप्रबंधक डॉ. दीपक मुरारी का कहना है कि पानी का प्लांट उद्यमिता की मिसाल और दूसरों के लिए प्रेरणा है। संवाद
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सात लोगों को मिल रहा है काम
चंपावत। कांडा गांव में पानी के पैकिंग प्लांट से क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। कारोबारी गतिविधियों में इजाफा हो रहा है। और सबसे बड़ी बात यह कि इस प्लांट से दोनों युवा खुद तो कमाई कर ही रहे हैं, ग्रामीण क्षेत्र के सात युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है।
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एक साल में क्षारीय पानी का लक्ष्य
चंपावत। पानी के इस प्लांट के बाद अब इन युवाओं का लक्ष्य एक साल के भीतर अल्कलाइन (क्षारीय) पानी उतारने का है। इस पानी के सेवन से शरीर के पीएच स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। ये पानी पेट संबंधी विकार, लीवर और हड्डियों के दर्द को कम करने में लाभदायक माना जाता है।