नोटबंदी का असर कृषक वर्ग में आंशिक रूप से दिखाई पड़ रहा है। खाद की खरीदारी इससे सर्वाधिक प्रभावित हुई है। यहां स्थित एकमात्र साधन सहकारी समिति की दुकान पर बड़े नोट नहीं लिए जाने से दिक्कतें आ रही हैं। किसानों को छोटी करेंसी के लिए कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल समिति सदस्यों को खाद की खरीदारी में दिक्कतें नहीं आ रही हैं। उनके लोन चेकइसके लिए स्वीकार किए जा रहे हैं।
इन दिनों गेहूं की फसल के लिए खाद की बिक्री चरम पर है। समिति सदस्य अपने खातों से उधार में (समिति लोन स्कीम) खाद ले पा रहे हैं। लेकिन अन्य किसानों को नई और छोटी करेंसी का इंतजाम करना पड़ रहा है। कुछ किसान अपने आसपास के लोगों से उधार लेकर खाद की खरीदारी कर रहे हैं। साधन सहकारी समिति सचिव दीनानाथ वर्मा ने बताया कि समिति के सदस्य अपने लोनिंग खातों के चेक से खाद खरीद रहे हैं। अब तक समिति ने बनबसा और टनकपुर में 65 क्विंटल यूरिया और 105 क्विंटल एनपीके की बिक्री हो चुकी है। बताया कि इन दिनों एनपीके 1000 रुपए और यूरिया का कट्टा 300 रुपए का है।
किसान हरीश कुमार के मुताबिक उन्हें खाद की खरीदारी में कोई दिक्कत नहीं आई। वे नोटबंदी को देश हित में बता रहे हैं। किसान जगत सिंह मिताड़ी का भी मानना है कि किसान को खाद की खरीदारी में कोई परेशानी नही आ रही है। बीडीसी सदस्य पुष्कर कापड़ी का कहना है कि छोटे किसान लोगों से उधर मांग कर खाद की खरीदारी को विवश हैं। समिति को किसानों से पुरानी करेंसी स्वीकार करनी चाहिए। कृषक मदन सामंत का कहना है कि समिति द्वारा बड़े नोट नहीं लेने से उन्हें छोटी करेंसी का बंदोबस्त कर खाद खरीदनी पड़ी। उधर, एसडीएम एके चन्याल ने बताया कि आरबीआई की गाइडलाइन्स बैंकों को जारी की जा रही हैं, प्रशासन इससे अनभिज्ञ है। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी प्रकार की दिक्कतें नही होने दी जाएंगी।