क्वैराला घाटी की बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सेवा देने के लिए सिप्टी में उप्र के दौर में राजकीय एलोपैथिक अस्पताल (एसएडी) खोला गया। भले ही अपना राज्य उत्तराखंड बन गया हो लेकिन उस समय से अब तक इस अस्पताल की हालत नहीं बदली। आखिर मरीजों को अस्पताल का फायदा मिले भी तो कैसे? अस्पताल के खुलने का कोई वक्त नहीं और मरीजों को भी इलाज मिलेगा, इसका भरोसा नहीं।
सिप्टी, सैंदर्क, मटेला, कोयाटी, मिर्तोला, लफ्ड़ा, बड़पास सहित यहां के तमाम गांवों की सेहत सिप्टी के इस अस्पताल के हवाले है, लेकिन जब बुधवार को अमर उजाला की टीम ने अस्पताल पर कदम रखे, तो नजारा कतई उम्मीद जगाने वाला नहीं था। सुबह 8 बजे से 10.05 बजे तक हम अस्पताल परिसर में रहे, लेकिन यहां के लटके ताले खोलने वाला कोई नहीं आया। डॉक्टर, फार्मेसिस्ट और चतुर्थ कर्मी की तैनाती के बावजूद अस्पताल स्टाफ का कोई अतापता नहीं। न कोई ताला खोलने वाला और न मरीजों की सुध लेने वाला। जाहिर है जब हाल इस कदर लापरवाही वाला हो, तो मरीज अस्पताल पहुंचकर अपना समय क्यों बर्बाद करेंगे?