जिले के मैदानी हिस्से टनकपुर-बनबसा में मानसून के समय बाढ़ सबसे बड़ी त्रासदी बनती है। इस वजह से काफी लोगों के मकान क्षतिग्रस्त होते हैं। और बड़ी संख्या में नदी के किनारे रहने वाले लोगों को दूसरी जगह विस्थापित होने को मजबूर होना पड़ता है। और इस बीच भी बनबसा में बीते एक सप्ताह में करीब 300 एमएम बारिश हो चुकी है। पर बाढ़ से निपटने को प्रशासन की तैयारी कागज को छोड़ कहीं नहीं है।
प्रशासन बाढ़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम का दावा जरूर कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि बाढ़ आने पर प्रशासन अक्सर असहाय हाल में नजर आता है। बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए नाव तक यहां नहीं है। केनाल के पास एक नाव थी, जो अब खराब हो चुकी है। नाव का इंतजाम भी ऊधमसिंह नगर अथवा दूसरे जगहों से करना पड़ता है। जेसीबी, पोकलैंड मशीन के अलावा दमकल के लिए भी उसे एनएचपीसी पर आश्रित रहना पड़ता है। मात्र एक तैराक है।
बाढ़ ही नहीं जलभराव के नजरिए से भी मैदान का ये इलाका खासा संवेदनशील है।
टनकपुर से बहकर आने वाले नालों का पानी बनबसा में जल भराव और बाढ़ का कारण बनता है। इसके अलावा क्षेत्र के पश्चिम में बहने वाली बरसाती हुड्डू नदी भी मानसून में सिरदर्द बनती है। ये नदी चंदनी, आनंदपुर, बमनपुरी गांव में जमीन का कटाव करती है। वहीं भजनपुर, पचपकरिया, फागपुर, देशीफार्म में जलभराव के हालात पैदा होते हैं। देवीपुरा गांव में तो मामूली बारिश में भी जलभराव आम है।
बाढ़ के मद्देनजर बनबसा को अति संवेदनशील माना गया है। बनबसा थाने में बाढ़ नियंत्रण चौकी बनाई गई है। प्रशासनिक कर्मियों को पुख्ता इंतजाम के निर्देश दिए गए हैं।
नरेश चंद्र दुर्गापाल, उप जिलाधिकारी, टनकपुर।
हैंडपंप का पानी भी पीने लायक नहीं
बरसात के दौरान हैंडपंप का पानी भी यहां पीने लायक नहीं रहता है। पाइपों के नालियों से निकलने की वजह से नलों मेें आने वाले पानी पर भी इस दौरान गंदगी का खतरा रहता है। इसी वजह से बरसात के दौरान अस्पताल जाने वालों की संख्या में भी खूब इजाफा होता है।
बाढ़ ने बहाया था जगबुड़ा पुल
इस इलाके में कई बड़ी बाढ़ आ चुकी हैं। जिनसे संपति का भारी नुकसान हुआ है। 20 सितंबर 2008 की जबर्दस्त बाढ़ ने तो राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनबसा स्थित जगबुड़ा पुल को चपेट में ले एक हिस्से को बहा दिया था। कई महीनों तक क्षेत्र का संपर्क मैदानी क्षेत्र से कट गया था। धनुष पुल की ओर से रुट डायवर्ट किया गया था। महीनों बाद वैकल्पिक व्यवस्था हो सकी थी। इसके अलावा भी यहां नुकसान पहुंचाने वाली ढेरों बाढ़ आई। 24 सितंबर 2002, 5 सितंबर 2003, 26 सितंबर 2003, सितंबर 2005, सितंबर 2006 में क्षेत्र में भीषण बाढ़ आई थी। 2008 में 20 और 21 सितंबर, 2009 में 10 एवं 13 सितंबर, 2010 में 8 अगस्त, 20 अगस्त और सितंबर, 2011 में 19 और 23 सितंबर को बाढ़ ने क्षेत्र में खासा नुकसान किया था। जिन वर्षो में बाढ़ नहीं भी आई, तो लोग जलभराव से परेशान रहे। बाढ़ से बनबसा के ग्राम चंदनी, आनंदपुर और बमनपुरी की कई एकड़ कृषि भूमि भूकटाव की भेंट चढ़ चुकी है।