जून 2013 की आपदा को 32 माह बीत चुके हैं, लेकिन सिप्टी घाटी के कई रास्ते मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं। अब तक ये पैदल रास्ते खराब हैं। रास्ते की मरम्मत नहीं होने से लोगों को परेशानी हो रही है। गुहार लगाते थक चुके नाराज ग्रामीण अब आंदोलन के मूड में हैं।
सिप्टी घाटी के अमकड़िया गांव के पूर्व फौजी अमरनाथ नरियाल का कहना है कि जून 2013 की बारिश में सैंदर्क से अमकड़िया के बीच का तीन किलोमीटर का पैदल रास्ता कई जगह क्षतिग्रस्त हो गया था। रास्ते के बुरे हाल के चलते ग्रामीणों ने जुगाड़ से आवाजाही लायक रास्ता बनाया। वहीं इसकी मरम्मत की भी लगातार आवाजें उठती रहीं, मगर अब तक इस रास्ते की सुध नहीं ली गई है। यह रास्ता अमकड़िया, लफड़ा और जमराड़ी ग्राम पंचायतों के गांवों के लिए गुजरता है। करीब 1500 की आबादी को इस मार्ग पर आवाजाही में परेशानी हो रही है। संकरा होने के चलते रास्ते से आना-जाना जोखिम भरा भी हो रहा है।
माधवानंद, रेवाधर नरियाल, नीतराम, शीशराम सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि इस दौरान कई बार विभिन्न मंचों से मामले को उठाने के बावजूद रास्ते की मरम्मत नहीं कराई जा सकी है। ग्रामीणों ने जल्द रास्ता ठीक नहीं किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी देते हुए प्रशासन को ज्ञापन भेजा है।