चंपावत/बनबसा/लोहाघाट। उत्तराखंड बनने के 22 साल बाद भी चंपावत जिले को पहले स्टेडियम का इंतजार है। यहां बना लॉन टेनिस का कोर्ट अब खराब होने लगा है। इस तरह की विसंगतियां खेलों के विकास और खेल प्रतिभाओं की राह में अड़चन पैदा कर रही हैं।
चंपावत में स्टेडियम बनाने की घोषणा दो मुख्यमंत्री कर चुके हैं लेकिन जमीन न मिलने के कारण वर्ष 2011 से शुरू ये कवायद साकार नहीं हो सकी। गोरलचौड़ मैदान को विस्तार देकर स्टेडियम बनाने का प्रस्ताव भी मैदान से लगी सेना की 77 नाली जमीन खेल विभाग को हस्तांतरित न हो पाने से लटक गया। वहीं वर्ष 2015 में स्वीकृत 1092.68 लाख रुपये की लागत वाले लोहाघाट का स्टेडियम भी 70 प्रतिशत ही बन सका है। उत्तर प्रदेश निर्माण निगम के एई पुष्पेंद्र वर्मा का कहना है कि अगले पांच महीनों में काम पूरा करा लिया जएगा।
वहीं बनबसा जीजीआईसी में लॉन टेनिस का कोर्ट बना दिया गया। बीएडीपी से 2017-18 में 12 लाख रुपये से 78 फीट लंबा और 27 फीट चौड़ा टेनिक कोर्ट बन गया जबकि न कॉलेज की ओर से इसका कोई प्रस्ताव गया और न ही कोई जरूरत थी। प्रधानाचार्या मीना शुक्ल का कहना है कि कोच के अभाव में इस कोर्ट का सदुपयोग नहीं पा रहा है।
चंपावत स्टेडियम के लिए 200 नाली जमीन की तलाश की जा रही है। लोहाघाट के छमनियाचौड़ स्टेडियम को इस साल दिसंबर तक पूरा करने के कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए गए हैं। - बीसी पंत, जिला क्रीड़ाधिकारी, चंपावत।
महज 53 लाख रह गया जिले का खेल बजट
चंपावत। चंपावत जिले में ही आधारभूत ढांचे की कमी तो है ही, अब खेल बजट में भी लगातार कमी आ रही है। पिछले सात वर्षों में जिला योजना में खेल बजट में 64 प्रतिशत की कमी हुई है।
जिले की 2022-23 की 42.82 करोड़ रुपये की प्रस्तावित जिला योजना में से खेल विभाग के हिस्से महज 53 लाख रुपये आए हैं। यह करीब सवा प्रतिशत है जबकि सात साल पहले 2016-17 में खेल विभाग को 149 लाख रुपये मिले थे। इस राशि का उपयोग खेल प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं के आयोजन सहित खेल गतिविधियां बढ़ाने में किया जाता है।
चंपावत जिले में सात वर्ष में जिला योजना से मिला खेल बजट
वर्ष बजट (लाख रुपये में)
2016-17 149.00
2017-18 49.02
2018-19 47.60
2019-20 52.35
2020-21 12.35
2021-22 31.50
2022-23 53.00
हॉकी में राष्ट्रीय स्तर पर अंपायरिंग का लोहा मनवा रहे भानु
टनकपुर (चंपावत)। चंपावत जिले ने हॉकी में राष्ट्रीय स्तर के अंपायर दिए हैं। टनकपुर के भानु अग्रवाल आठ से अधिक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अंपायरिंग का लोहा मनवा चुके हैं। रक्षा पंक्ति के शानदार खिलाड़ी रहे भानु को हॉकी से इस कदर जुनून था कि इस खेल से नाता बने रहे इसके लिए उन्होंने अंपायरिंग की परीक्षा पास की।
वर्ष 2014 में हल्द्वानी में हुई राष्ट्रीय सब जूनियर हॉकी प्रतियोगिता से अंपायरिंग का कॅरिअर शुरू करने वाले अग्रवाल बेटन कप, बॉम्बे गोल्ड कप, ओबेदुल्ला कप, गुरुगुंडा कप सहित राष्ट्रीय हॉकी प्रतिस्पर्धा में अंपायरिंग कर चुके हैं। वह बताते हैं कि अंपायरिंग के लिए खिलाड़ियों, गेंद पर पैनी नजर, शारीरिक फिटनेस के अलावा सहयोगी अंपायर के साथ बेहतर समन्वय जरूरी है। वर्ष 2017-18 में उन्होंने राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनआईएस) बेंगलुरु से डिप्लोमा किया। अग्रवाल वर्ष 2001 से हॉकी खेलते रहे हैं। टनकपुर स्टेडियम में वर्ष 2001 में हॉकी प्रशिक्षक सतीश जोशी से प्रशिक्षण लेने के बाद राष्ट्रीय कैंप में भी हिस्सा लिया। बेंगलुरु के अलावा लखनऊ में भी वह दो बार सीनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।