टनकपुर (चंपावत)। सूखीढांग के तल्लापाल विलौन क्षेत्र के गांव संचार सुविधा से वंचित हैं। शहरों से गांव पहुंचते ही डांडा, ककनई, बुंगा दुर्गापीपल, कठौती, बुडम, कलौल, श्री ब्यानधूरा धाम, सुकनी, कलाड़, मुगरौ, लुहारजूला, पाटली, अमगढ़ी, मथियाबांज, बयाला, सेतीचौड़ आदि गांवों के लोगों के मोबाइल फोन शोपीस बन जाते हैं। कोरोना संकट में बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई में भी संचार सुविधा का अभाव बाधक बना है। आपात स्थिति में घरों से दूर ऊंची पहाड़ियों में जाकर बात करना लोगों की मजबूरी है। कुछ साल पहले तक संघर्ष की बदौलत सड़क सुविधा पा चुके इन गांवों के लोगों की अब संचार सुविधा पहली मांग बन गई है। टनकपुर-चंपावत राजमार्ग में भी कमजोर कनेक्टिविटी से यात्री परेशान रहते हैं। ग्रामीण जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक से कई बार संचार सुविधा मांग चुके हैं, लेकिन मांग पूरी नहीं हो सकी। ग्राम पंचायत प्रतिनिधि अब संचार सुविधा के लिए जनांदोलन शुरू करने का मन बना रहे हैं।
क्षेत्र के गांवों में संचार सुविधा की मांग 15 साल से उठाई जा रही है। विधायक, सांसद, डीएम से कई बार गुहार लगा चुके हैं। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के उदासीन रवैये से ग्रामीणों में गुस्सा है।
- पं. शंकर जोशी, अध्यक्ष श्री ब्यानधूरा मंदिर सेवा समिति सूखीढांग।
संचार सुविधा न होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अपनों तक जरूरी सूचनाएं पहुंचाने के लिए घर से दूर ऊंची पहाड़ी पर या सूखीढांग जाकर मोबाइल नेटवर्क खोजने पड़ रहे। - अनीता महरा, बीडीसी सदस्य ग्राम पंचायत ककनई।
संचार सुविधा आज वक्त की जरूरत बन गई है। डिजिटल युग में भी सीमांत क्षेत्र के गांवों में संचार सुविधा का अभाव विकास में पिछडे़पन को दर्शाता है। ग्रामीणों की अनदेखी बंद न होने पर जनांदोलन किया जाएगा।
- मोहन सिंह बिष्ट, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत बुड़म।
कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए कई लोगों को अपने बच्चे टनकपुर या चंपावत में किराए के मकान में रखने पड़े हैं। सड़क बनने से सूखीढांग से रीठा साहिब जाने वाले यात्रियों की संख्या के साथ सुविधा भी बढ़नी चाहिए।
- गीता महरा, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत कठौती।