राज्य गठन के 16 साल बाद भी जिंडी, ढुंगाजोशी, बंजवाड़ गांव सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। सड़क न होने और अन्य परेशानियों के चलते करीब सात साल में ही इन गांवों के 25 परिवार दूसरी जगह बस गए हैं। गांव में ज्यादातर बुजुर्ग और महिलाएं बच गई हैं।
बाराकोट विकासखंड के इन गांवों में न तो शिक्षा और न ही स्वास्थ्य सुविधाएं हैं। गांव के लोगों ने कई बार सड़क की मांग की लेकिन उनकी मांगें कभी पूरी नहीं हुई। ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव में रोड नहीं तो वोट नहीं का ऐलान किया था। बाद में प्रशासन ने ग्रामीणों को मतदान के लिए राजी कर लिया था। वर्तमान में जिंडी में 35 परिवार, ढुंगाजोशी में 18 और बंजवाड़ गांव में 25 परिवार ही शेष रह गए हैं। बीते सात सालों में जिंडी से 10, ढुंगाजोशी से 8 और बंजवाड़ से सात परिवार दूसरी जगह जाकर बस गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जिंडी और ढुंगाजोशी गांवों में राजकीय प्राथमिक स्कूल तक नहीं है। यहां के बच्चे एक किमी से अधिक दूरी तय कर देवराड़ी या काकड़ में पढ़ने जाना पड़ता है। यहीं नहीं सड़क न होने से बीमार लोगों को डोली से दो से ढाई किमी दूर सड़क तक लाना पड़ता है। इन गांवों में किसी तरह का स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने से यहां के लोगों मामूली इलाज के लिए भी राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बाराकोट आना पड़ता है।
सरकार गठन का इंतजार कर रहे हैं ग्रामीण
गांव के विवेक जोशी, अनिल जोशी, हेमा अधिकारी, रमेश जोशी, ललित अधिकारी, अर्जुन नाथ गोस्वामी, हरीश नाथ, पीएस अधिकारी आदि का कहना है कि इन तीनों गांवों के लिए करीब 4.5 किमी सड़क की जरूरत है। सरकार बनने के बाद रोड के काम में ठोस प्रगति नहीं होने पर ग्रामीण फिर से आंदोलन करेंगे।
काकड़ से ढुंगाजोशी गांव के लिए विभाग की टीम कई बार सर्वे गई। मगर शुरुआती स्थल में ही एलाइमेंट विवाद के चलते आगे बात नहीं बढ़ सकी। इस विवाद को सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-अवर अभियंता, लोनिवि, लोहाघाट डिवीजन।