भले ही राज्य और केंद्र सरकार की ओर से सड़क, स्वास्थ्य सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की बेहतरी के दावे किए जा रहे हो, लेकिन चंपावत जिले के सीमांत गांवों में सड़क सुविधा नहीं होने से बीमारों और मरीजों को आज भी कुर्सी की डोली बनाकर जिला मुख्यालय लाया जा रहा है।
सीमांत भंडारबोरा ग्राम पंचायत में सड़क, स्वास्थ्य सहित अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को गांव की 58 वर्षीय हीरा देवी की तबीयत अचानक खराब होने पर ग्रामीणों ने उन्हें डोली के सहारे छह किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़कर मौनपोखरी सड़क तक पहुंचाया।
उसके बाद वाहन के जरिए महिला को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2014 में भंडारबोरा गांव सहित विभिन्न तोकों के लिए पूर्व में लोक निर्माण विभाग की ओर से सड़क प्रस्तावित की गई थी। विभाग की ओर से सड़क के निर्माण के दौरान काटे जाने वाले पेड़ों की कमी पूरी करने के लिए हरतोला में प्रस्तावित भूमि पर पौधरोपण किया जाएगा।
केंद्र सरकार की ओर से की गई गूगल मैपिंग में इस स्थान पर काफी पेड़ पाए गए, इसके बाद प्रस्तावित सड़क पर वन अधिनियम की आपत्ति लग गई। ग्राम प्रधान त्रिलोक सिंह, चंचल सिंह कुंवर, डूंगर सिंह आदि का कहना है कि वन आपत्ति का निस्तारण नहीं होने के कारण करीब छह किलोमीटर लंबाई की सड़क का निर्माण अधर में लटक गया है।
इसका खामियाजा ग्रामीणों को उठाना पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग का कहना है कि सिविल अथवा आरक्षित वन पंचायत में बिना भारत सरकार द्वारा वन भूमि हस्तांतरण हुए निर्माण कार्य संभव नहीं है।
खेती के लिए काफी उपजाऊ है भंडारबोरा
चंपावत। सीमांत क्षेत्र की भंडारबोरा ग्राम पंचायत खेती के मामले में काफी उपजाऊ मानी जाती है। यहां बासमती धान के साथ ही अन्य फसलों और सिटरस फलों का व्यापक उत्पादन होता है, लेकिन यहां के काश्तकार अपनी उत्पादित कृषि उपज को सड़क सुविधा के अभाव में बाजार तक नहीं पहुंचा पाते हैं।