मलयेशिया में गिरफ्तार किए गए रीठा साहिब तलाड़ी के अशोक कुमार भट्ट पुत्र विद्याधर भट्ट को राहत नहीं मिल पाई। उन्हें मलयेशिया पुलिस की गिरफ्त से बाहर आने में अभी कुछ वक्त और लगेगा। 17 जुलाई को मलयेशिया की अदालत में इस मामले की सुनवाई थी।
अशोक के चचेरे भाई सुनील भट्ट ने बताया कि सुनवाई के दौरान भारतीय दूतावास की ओर से अशोक की पैरवी के लिए कोई नहीं पहुंचा। अशोक का मित्र संदीप ही एकमात्र अदालत गए थे।
पर्यटक वीजा में अशोक कुमार भट्ट अपने पंजाब निवासी मित्र संदीप के यहां मलयेशिया में एक माह के लिए घूमने गया था।
17 जून को जब वह बाजार में घूमने गया तो वह अपना पासपोर्ट और वीजा मित्र के कमरे में भूल गया। चेकिंग के दौरान पासपोर्ट और वीजा न दिखाने पर अशोक को मलयेशिया पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वैसे अशोक का वीजा आठ जुलाई तक था।
सुनील ने बताया कि जन प्रतिनिधियों, भारत सरकार, विदेश मंत्री, भारतीय दूतावास से अशोक को मलयेशिया पुलिस की गिरफ्त से छुड़ाने की गुहार लगाई जा रही है, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। रिहाई की आस लगाए अशोक के पिता विद्याधर भट्ट, ताऊ रमेश चंद्र भट्ट, मां ईश्वरी देवी, भाई राकेश, बहन रेनू, भाभी कमला काफी परेशान हैं।
दूतावास से ठोस पैरवी की गुहार लगाई
अशोक की रिहाई की मांग को लेकर भारतीय दूतावास, विदेश मंत्री ओर भारत सरकार से संपर्क बनाने वाले लधिया घाटी संगठन के कार्यकर्ता नवीन भंडारी का कहना है कि अशोक की रिहाई के मामले में भारतीय दूतावास ने ठोस पैरवी नहीं की।
इस कारण अशोक की रिहाई नहीं हो सकी। इस संबंध में उन्होंने विदेश मंत्री, उनके निजी सचिव, भारत सरकार से भारतीय दूतावास में संपर्क कर रिहाई की दिशा में ठोस पहल करने की मांग को लेकर मेल भेजा है।