नेपाल सीमा से लगे चूका गांव में खेत में क्रिकेट की पिच बना खेलते ग्रामीण युवा।
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चंपावत। दुनिया का सबसे बड़ा खेल महाकुंभ बस दो दिन दूर है। देश-दुनिया की तरह ही भारत में भी खेल प्रेमी 23 जुलाई से आठ अगस्त तक ओलंपिक के बुखार में होंगे। इन 33 खेल स्पर्धाओं में 339 पदकों के लिए दुनियाभर के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पूरी ताकत झोंकेंगे। दूसरी तरफ खेल प्रतिभाओं के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में खास आधारभूत ढांचा नहीं है। चंपावत जिले में ही राज्य बनने के बाद एक भी स्टेडियम नहीं बन सका है। जिले की 313 ग्राम पंचायतों में से 164 में छोटा सा खेल मैदान भी नहीं है। मैदानों की तो भारी कमी है, लेकिन खेलों से खिलवाड़ कम नहीं है। जिले के प्रवेशद्वार बनबसा में ही लॉन टेनिस कोर्ट बनाने पर मोटी रकम लगी, लेकिन इसका उपयोग नहीं हो रहा।
राज्य बनने के दो दशक बाद भी जिले में कोई नया स्टेडियम नहीं बन सका है। लोहाघाट का निर्माणाधीन स्टेडियम कभी घटिया गुणवत्ता, तो कभी बजट के अभाव में काम लटकने की वजह से चर्चा में है। चारों ब्लॉक मुख्यालयों में एक-एक खेल कांप्लैक्स का प्रस्ताव भी निशुल्क जमीन नहीं मिलने से खारिज हो गया। लेकिन सीमावर्ती क्षेत्र विकास कार्यक्रम से बनबसा जीजीआईसी में 2017-18 में 12 लाख रुपये का 78 फीट लंबा और 27 फीट चौड़ा लॉन टेनिस कोर्ट बना दिया गया। 2019 में इस कोर्ट को ग्रामीण निर्माण विभाग ने शिक्षा विभाग को हस्तांतरित भी कर दिया। यहां तक कि उसमें न तो नैट है और न ही स्टैंड। दो साल से अधिक बीतने के बावजूद इस कोर्ट में न तो कभी टेनिस खेली गई और नहीं कोई प्रतियोगिता हुई। यहां तक कि न कोई छात्रा इसे खेलती है और नहीं इसका प्रशिक्षण देने वाला कोई कोच है।
प्रधानाचार्या गीता चंद का कहना है कि इस कोर्ट के लिए कॉलेज की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं गया था और न ही खेल को सीखाने की कोई शिक्षिका है। जिला क्रीड़ाधिकारी आरएस धामी का कहना है कि बनबसा में टेनिस कोर्ट का निर्माण औचित्यपूर्ण नहीं था। न तो शिक्षा विभाग और नहीं खेल विभाग के पास लॉन टेनिस का प्रशिक्षक है। टेनिस का रैकेट और बॉल भी खासी महंगी है। संवाद
धन के दुरुपयोग की जांच हो
चंपावत। बनबसा में टेनिस कोर्ट को क्षेत्र के लोग खेल से खिलवाड़ बता रहे हैं। कहते हैं कि न इस खेल की छात्राओं को कोई जानकारी है और नहीं खेल का हुनर देने वाला कोई है। जिला पंचायत सदस्य पुष्कर दत्त कापड़ी, गौरव सेनानी कल्याण समिति बनबसा-टनकपुर के अध्यक्ष कैप्टन भानी चंद ने इसे धन की बर्बादी बताते हुए जांच की मांग की है।
खेतों में खेलने को मजबूर हैं ग्रामीण युवा
चंपावत। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल मैदानों की जबर्दस्त कमी है। छोटे-छोटे खेल मैदान तक नहीं है। इस वजह से अधिकांश जगह युवा खेतों में खेलने को मजबूर हैं। चंपावत जिले की 313 ग्राम पंचायतों में से 164 में छोटा खेल मैदान भी नहीं है। पंचायत युवा क्रीड़ा एवं खेलकूद योजना के तहत सात साल पहले एक-एक लाख रुपये से 149 पंचायतों में खेल मैदान बनाए गए, लेकिन इन मैदानों में भी कबड्डी और वॉलीबाल ही खेले जा सकते हैं।