चंपावत में बुनियादी विकास के दावों की हवा चुनाव के दौरान खुद-ब-खुद निकल जाती है। ढेरों ऐसे इलाके हैं, जहां से जुड़ने के लिए न रोड है और न संचार की किसी तरह की कोई सुविधा। जिले के 17 मतदेय स्थलों में मोबाइल या लैंडलाइन किसी तरह की फोन सेवा नहीं है। इन पोलिंग बूथों के लिए संचार से जुड़ने को वैकल्पिक रास्ता अपनाना होगा।
90 किलोमीटर नेपाल सीमा से लगे चंपावत जिले का करीब 14 प्रतिशत हिस्सा संचार सुविधा से कटा है। नेपाल सीमा से लगा तल्लादेश और तल्लापाल क्षेत्र के 55 से अधिक गांवों में संचार सुविधा नहीं हैं। इन इलाकों में न मोबाइल सिग्नल हैं और न ही लैंडलाइन फोन की सुविधा।
15 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में ही जिले के 17 मतदेय स्थल मोबाइल सुविधा से वंचित हैं। ये सभी बूथ चंपावत सीट के अंतर्गत आते हैं। इन बूथों की गतिविधियों और हर घंटे के मतदान को जानने के लिए चुनाव में लगी मशीनरी को वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लेना पड़ेगा। जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ.अहमद इकबाल का कहना है कि संचार सुविधा से कटे मतदेय स्थलों में लगी चुनाव और सुरक्षा टीम को वायर लेस सुविधा से लेस किया जाएगा।
चंपावत जिले के मोबाइल सुविधा से वंचित मतदेय स्थल
कोट अमोड़ी, वैला, अमगढ़ी, बुड़म, डांडा, मुगरों (ककनई), बुंगा दुर्गापीपल, रियासी, बकोड़ा, मटकांडा, सौराई, कुकड़ौनी, सिमियाऊरी, आमनी, तामली, पोलप और थपलियालखेड़ा।