चंपावत। कोविड काल में खस्ताहाल हुई कारोबारी स्थिति को उबारने के लिए कई योजनाएं शुरू हुई हैं, लेकिन कारोबारियों को इन योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसी कारण दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत 24 आवेदन बैंकों में ही लटके हैं।
शहरी आजीविका मिशन के तहत तीन लाख रुपये तक की आमदनी वाले कारोबारी को दुकान के विस्तार या नई दुकान खोलने के लिए सात प्रतिशत ब्याज पर दो लाख रुपये तक का कर्ज दिया जा रहा है। नगर पालिका के सिटी प्रबंधक महेश चौहान ने बताया कि इसके तहत जिले की चारों नगर निकायों में 51 कारोबारियों ने आवेदन किया, लेकिन अभी इसमें सिर्फ 27 को ही कर्ज मिल सका है। बकाया 24 आवेदन बैंकों में ही लंबित हैं। कई कारोबारियों ने आरोप लगाया कि बैंक प्रबंधक कर्ज देने में रुचि नहीं ले रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए लोगों ने कर्ज बांटने संबंधी बैंकों का लक्ष्य बढ़ाने की मांग की है।
210 आवेदन बैंक भेजे गए कर्ज मिला सिर्फ 56 को
फड़ कारोबारियों को भी कर्ज देने की सुस्त हैं बैंक
चंपावत। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत फड़ कारोबारियों को दस हजार रुपये तक का ब्याज रहित कर्ज देने की योजना शुरू की गई थी, लेकिन इस योजना का लाभ भी कम ही लोगों को मिल सका है। बैंकों को भेजे गए आवेदनों में से बमुश्किल 26 प्रतिशत को ही कर्ज दिया गया है। चंपावत जिले की चारों नगर निकायों की सीमा में फड़ लगाने वाले 299 लोगों ने योजना के तहत कर्ज के लिए आवेदन किया। इनमें से 210 आवेदन पत्र बैंकों को भेजे गए, लेकिन इनमें से सिर्फ 56 लोगों को ही कर्ज मिल सका है। इनमें टनकपुर के 32, चंपावत के 16, लोहाघाट, बनबसा के चार-चार लोग शामिल हैं।
सरकारी योजनाओं के लिए समयबद्ध तरीके से कर्ज दिलाने के निर्देश बैंकों को दिए जाएंगे। सरकारी योजनाओं का प्रभावी तरह से क्रियान्वयन कराया जाएगा। साथ ही बैंकों की रकम वापसी भी सुनिश्चित करवाई जाएगी।
- एके जोशी, लीड बैंक प्रबंधक, चंपावत।