चंपावत। तल्लादेश के लोगों को सुविधा देने के मकसद से नौ दिसंबर 2016 को मंच में उप तहसील बनी, लेकिन पूरे 44 माह बाद भी यहां एक भी प्रमाणपत्र नहीं बन सका है। इसकी वजह उप तहसील कार्यालय में 2017 से बंद होना है। कर्मियों की कमी समेत कमजोर संचार नेटवर्क से भी परेशानी है। इसके चलते इस उप तहसील के सभी कामकाज 33 किमी दूर चंपावत तहसील से हो रहा है।
नेपाल सीमा से लगे मंच में 56 राजस्व गांवों की करीब 11 हजार की आबादी को सुविधा देने के लिए 2016 में उप तहसील कार्यालय शुरू हुआ, लेकिन सहूलियत के लिए बनी यह उप तहसील खुद लोगों के लिए समस्या बन गई है। 44 माह बीतने के बावजूद इस उप तहसील से स्थायी निवास, चरित्र, आय, जाति प्रमाणपत्र नहीं बन सके हैं। दिसंबर 2016 के बाद क्षेत्र के 577 लोगों ने चंपावत तहसील कार्यालय से जाति, आय, स्थायी निवास, हैसियत आदि प्रमाणपत्र बनाए हैं।
शुरू में चार हफ्ते के लिए चंपावत से नायब तहसीलदार को भेजा गया था, लेकिन फिर उन्हें वापस बुलाने के बाद मंच में किसी कर्मी को न भेजने के कारण जनवरी 2017 से ताला लटक गया। उपतहसील के चार सप्ताह खुले दरवाजे के दौर में भी नेटवर्क न होने से ऑनलाइन प्रमाणपत्र नहीं बन सके। पूर्व प्रधान विपिन जोशी, हीरा सिंह, भुवन जोशी, राहुल महरा, शेर सिंह, दान सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि उपतहसील से लोगों को अपने गांवों के पास सुविधा मिलने के बजाय 33 से 51 किमी फासला तय कर चंपावत से प्रमाणपत्र बनाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
मंच में कमजोर मोबाइल नेटवर्किंग के कारण प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे हैं। नेटवर्किंग में सुधार के लिए बीएसएनएल के इंजीनियरों से कहा गया है। कार्मिकों की कमी से नायब तहसीलदार सहित अन्य कर्मी भेजने में दिक्कत आ रही है। इन वजहों से मंच उप तहसील से संबंधित सभी काम चंपावत तहसील कार्यालय से हो रहे हैं।
- सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।
मंच सहित तल्लादेश क्षेत्र में अभी बीएसएनएल की टू-जी सेवा है। इस वजह से इंटरनेट की गति कम है। जिला मुख्यालय के बाद तहसील मुख्यालयों में थ्री-जी सेवा पर काम चल रहा है। - एके गुप्ता, महाप्रबंधक, बीएसएनल।