चंपावत/लोहाघाट। चंपावत जिले में स्वास्थ्य महानिदेशक के आदेश भी मायने नहीं रखते। यहां भेजे जा रहे अधिकतर डॉक्टर यहां सेवा नहीं दे रहे हैं। डेढ़ माह में पांच डॉक्टरों के स्थानांतरण आदेश हुए, लेकिन इनमें से एक भी सेवा नहीं दे रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए डॉक्टरों की तैनाती संबंधी जनप्रतिनिधियों के दावे भी हवा-हवाई हो रहे हैं।
स्वास्थ्य महानिदेशक ने अगस्त में पांच डॉक्टरों की लोहाघाट उपजिला अस्पताल में तैनाती के आदेश किए। इनमें अस्थिरोग, नेत्र सर्जन, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, माइक्रोबायोलॉजिस्ट शामिल थे, लेकिन इनमें से दो डॉक्टर आए ही नहीं और दो डॉक्टर कार्यभार ग्रहण करने के बाद से गैरहाजिर हैं। कार्यभार ग्रहण करने के तुरंत बाद ही माइक्रोबायोलॉजिस्ट को लोहाघाट से जिला अस्पताल रुद्रपुर संबद्ध कर दिया गया। ऐसे में इन आदेशों का कोई भी फायदा क्षेत्र के लोगों को नहीं मिल रहा है। एमएस डॉ. जुनैद कमर का कहना है कि हालात से उच्चाधिकारियों को बता दिया गया है। हर आदेश के अनुरूप जरूरी कार्यवाही की जाएगी।
विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से मायूस लौट रहे मरीज
लोहाघाट (चंपावत)। नगर के पास के चांदमारी गांव से बुजुर्ग हयात सिंह हड्डी से संबंधित परेशानी के चलते अस्पताल आए, लेकिन अस्थि रोग विशेषज्ञ न होने से उन्हें मायूस होना पड़ा। बाद में उन्हें निजी अस्पताल की शरण लेनी पड़ी। यही स्थिति रोज कई अन्य लोगों के साथ भी है, क्योंकि चंपावत जिले में सबसे अधिक मरीज उप जिला अस्पताल लोहाघाट में ही आते हैं। बृहस्पतिवार को 135 से अधिक मरीज आए, लेकिन इनमें से 29 को विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से परेशानी हुई। लोहाघाट में डॉक्टरों के सृजित 21 पदों में से फिलहाल एमएस सहित महज 10 डॉक्टर ही सेवारत हैं।
जिन पांच डॉक्टरों के अगस्त में लोहाघाट उप जिला अस्पताल में तैनाती के आदेश हुए थे, उनमें से तीन कार्यभार ग्रहण करने के बाद नहीं लौटे, जबकि दो ने कार्यभार भी ग्रहण नहीं किया। इससे अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। पूरे मामले को लेकर स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेजा जा रहा है।
- डॉ. आरपी खंडूरी, सीएमओ, चंपावत।