चंपावत। चंपावत जिला फिर फिजीशियन विहीन हो गया है। 11 दिनों तक यहां फिजीशियन तैनात रहे, लेकिन फिर उनका तबादला कर दिया गया है। 20 जून को ऋषिकेश के फिजीशियन डॉ. एमके सैनी का तबादला चंपावत हुआ। तबादला आदेश के 26 दिनों बाद 15 जुलाई को डॉ. सैनी ने चंपावत जिला अस्पताल में कार्यभार ग्रहण किया।
अलबत्ता अब उनका स्थानांतरण फिर से पौड़ी जिले के कोटद्वार अस्पताल कर दिया गया। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. आरके जोशी ने बताया कि फिजीशियन का स्थानांतरण स्वास्थ्यगत कारण से किया गया है। अलबत्ता अभी उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया है। 15 जुलाई को ज्वाइन करने वाले डॉ. सैनी ने मंगलवार तक 9 दिन ही मरीजों को देखा।
इस दौरान 16 और 23 जुलाई को रविवार की वजह से अस्पताल की ओपीडी बंद रही। डॉ. सैनी के स्थानांतरण से चंपावत जिला एक बार फिर फिजीशियन विहीन हो गया है। वहीं, जिला अस्पताल में डॉक्टरों की भी भारी कमी है। 26 पदों के सापेक्ष 14 पर ही तैनाती हैं।
कार्डियोलॉजिस्ट, निश्चेतक, न्यूरोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, प्लास्टिक सर्जन, ईएनटी, चर्म रोग, बाल रोग विशेषज्ञ सहित डॉक्टरों के 12 पद खाली हैं। तीन डॉक्टर प्रदीप बिष्ट, डॉ. राशि भटनागर, डॉ. बबीता वर्मा पीजी की पढ़ाई के लिए अवकाश पर है। वहीं एक संविदा डॉक्टर आबिद खान छह जुलाई से अवकाश में हैं। नतीजतन चार ब्लॉक और पांच तहसील वाले इस जिले की 2.65 लाख की आबादी को कायदे का इलाज नहीं मिल पा रहा है।
चंपावत के सबसे बड़े जिला अस्पताल में आपात चिकित्सा सेवा की खास व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में एक भी इमरजेंसी मेडिकल अफसर (ईएमओ) की तैनाती नहीं है। सीएमएस का कहना है कि तीन ईएमओ के पद सृजित हैं, लेकिन एक की भी तैनाती नहीं है। इसके चलते बारी-बारी से डॉक्टरों को ईएमओ का दायित्व दिया गया है।
निश्चेतक के प्रतिस्थानी नहीं भेजे
चंपावत जिला अस्पताल में सर्जन और रक्त की व्यवस्था होने के बावजूद ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। इसकी वजह निश्चेतक का न होना। यहां के निश्चेतक का पिछले महीने खटीमा स्थानांतरण हो गया और इस माह के शुरू में उन्हें रिलीव कर दिया गया, लेकिन उनके प्रतिस्थानी नहीं भेजे। सीएमएस डा.जोशी का कहना है कि निश्चेतक की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है।
महिलाओं का इलाज नहीं हो पा रहा
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ के अवकाश पर होने से महिला रोगों के इलाज में दिक्कत आ रही है। यहां की गायिनाकोलॉजिस्ट 15 अगस्त तक छुट्टी पर हैं। सीएमएस का कहना है कि वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ के अलावा एलएमओ के तीन पद हैं, लेकिन फिलहाल यहां एक भी एलएमओ नहीं है। सीएचसी से संबद्ध मात्र एक महिला चिकित्साधिकारी हैं। इलाज नहीं मिलने से महिलाओं को पिथौरागढ़ या खटीमा की दौड़ लगानी पड़ती है।