चंपावत। टनकपुर से सात किमी दूर बाटनागाड़ नाला पिछले तीन दिन से परेशानी का सबब बना है। इस खतरे के कारण दो सड़कों पर रात में वाहनों की आवाजाही रोकी गई है। लोगों के लिए सिरदर्द बन रहे इस नाले पर पुल की मंजूरी के बावजूद खास प्रगति नहीं हो सकी है।
बाटनागाड़ का नाला पूर्णागिरि धाम के अलावा सीमांत के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण है। नेपाल सीमा से लगी टनकपुर-जौलजीबी सड़क और ककरालीगेट-भैरव मंदिर सड़क पर आवाजाही के लिए यहीं से होकर गुजरना होता है। करीब 600 मीटर लंबे बाटनागाड़ का अधिकतर हिस्सा रोखड़ में तब्दील हो चुका है। श्यामलाताल के पास बिसौरिया से होने वाले भूस्खलन से वहां भारी मात्रा में मलबा पहुंचता है। इससे कई बार यह सड़क टूट चुकी है।
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धार्मिक और सामरिक महत्व को देखते हुए सीएम धामी ने इस साल पूर्णागिरि मेले के शुभारंभ मौके पर नौ मार्च को बाटनागाड़ पर पुल बनाने की घोषणा की थी लेकिन पौने चार माह बाद भी पुल बनाने के लिए खास कवायद नहीं हो सकी है। हालांकि कठिन भौगोलिक हालात और मोड़ की वजह से मुश्किलें भी कम नहींं हैं।
बाटनागाड़ में पुल निर्माण के लिए मई में पहले चरण का आगणन शासन में भेजा गया है। सर्वे और भूगर्भीय परीक्षण के लिए बजट की मांग की गई है। बजट मिलने के बाद परामर्शदाता एजेंसी का निर्धारण किया जाएगा। - बीसी पंत, ईई, लोनिवि, चंपावत खंड।
(02 सीपीटी 13पी)