चंपावत। जिले में मनरेगा के तहत राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी सॉफ्टवेयर (एनएमएमएस) लागू होने से विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों पर ब्रेक लग गया है। नए साल में किसी भी कार्य के लिए डीपीआर, जियो-टैग, एसटीए सहित अन्य कार्य नहीं हो पाए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर स्थानों पर मोबाइल नेटवर्क की दिक्कतें होने से इस सिस्टम का लाभ होता नहीं दिख रहा है।
पहली जनवरी से मनरेगा में एनएमएमएस को लागू कर दिया गया है। इसे 21 मई 2021 को लॉन्च किया गया था जिसके तहत मनरेगा में होने वाले कार्यों के दौरान मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होनी है। उन्हीं लोगों के खाते में भुगतान डाला जाएगा जो लोग इस ऑनलाइन उपस्थिति में मौजूद रहेंगे लेकिन चंपावत जिले के अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन उपस्थिति की मौजूदगी दर्ज करा पाना संभव नहीं हो पा रहा है।
जिसका ग्राम प्रधानों ने भी विरोध किया है। यह व्यवस्था लागू होने से सभी ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप पड़ गए हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 की कार्य योजना पर भी कार्य शुरू नहीं हो सका है।
अधिकतर ग्राम पंचायतों में पूरे नहीं हो पाए हैं कार्य
चंपावत। जिले की 313 ग्राम पंचायतों में कई विकास कार्य शेष हैं। नई व्यवस्था लागू होने से अब वे भी प्रभावित हो गए हैं। विकास कार्य न होने से गांव में रहने वाले लोगों को भी काफी दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। वहीं, लोग बेरोजगार हो गए हैं।
केंद्र सरकार की ओर से एनएमएमएस को लागू किया गया है। कार्य स्थल से ही मजदूरों को एप के माध्यम से ऑनलाइन सुबह-शाम उपस्थिति दर्ज करानी है, लेकिन अधिकतर स्थानों पर मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसके लिए कोई विकल्प निकाल कर विकास कार्य शीघ्र सुचारु किए जाएंगे। - कविंद्र सिंह रावत, बीडीओ, चंपावत।