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मां पूर्णागिरि मेले के अस्थायी निर्माण में नौ साल में खर्च हो गए 2.15 करोड़

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जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी राजेश कुमार। - फोटो : CHAMPAWAT
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मां पूर्णागिरि धाम का मेला इस बार 11 मार्च से शुरू हो 97 दिन तक चलेगा। इस सरकारी अवधि में हर साल अस्थायी निर्माण में लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। बीते नौ वर्षों में अस्थायी निर्माण में 2.15 करोड़ रुपये लग चुके हैं। अगर वन भूमि आड़े न आती तो इस राशि में स्थायी निर्माण हो जाता। हर साल अस्थायी निर्माण पर 20 लाख रुपये से अधिक खर्च होते हैं। इसके चलते जिला पंचायत को काफी मोटी रकम हर साल अस्थायी निर्माण में लगानी पड़ती है।
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मां पूर्णागिरि देवी के दर्शन के लिए बरसात को छोड़ अन्य समय में नियमित रूप से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मुख्य रूप से होली के बाद शुरू होने वाले मेले की तीन माह से अधिक की अवधि में 25 लाख से अधिक तीर्थयात्री उमड़ते हैं। जिला पंचायत संचालित मेले की तीन माह की अवधि के लिए जिला पंचायत कार्यालय, मेला मजिस्ट्रेट कार्यालय, रैनबसेरा, सफाई, स्वास्थ्य, सुरक्षा, यात्रियों की सुरक्षा सहित तमाम जरूरी व्यवस्था की जाती है।
इसके लिए पंचायत ऐसे तमाम विभागों के लिए आवासीय व्यवस्था के अंतर्गत करीब 21 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में अस्थायी टिन शेड्स बनाती है। चंपावत के प्रभारी प्रभागीय वनाधिकारी एमएम भट्ट ने कहा कि आरक्षित वन क्षेत्र में गैर वानिकी कार्य प्रतिबंधित है। इसके चलते मां पूर्णागिरि धाम मेला क्षेत्र के आरक्षित वन क्षेत्र में निर्माण कराया जाना वर्जित है।
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नौ वर्ष में आवासीय टिन शेड्स में हुआ खर्च:
वर्ष खर्च (लाख रुपये में)
2011: 12.79
2012: 15.80
2013: 23.21
2014: 34.60
2015: 24.82
2016: 24.35
2017: 31.20
2018: 24.42
2019: 24.00
कुल खर्च 215.22
मां पूर्णागिरि धाम का मेला क्षेत्र मुख्य रूप से आरक्षित वन क्षेत्र के दायरे में आता है। आरक्षित वन क्षेत्र होने से स्थायी निर्माण मुमकिन नहीं है। इस कारण अस्थायी निर्माण कराया जाता है। जिला पंचायत ने पूर्व में मेला क्षेत्र में लीज की जमीन के लिए आवेदन किया है। राजेश कुमार अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत।
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