हादसों को न्यौता दे रहे एनएच पर खोखले और झूलते पेड़
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जुलाई 2008 में टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच पर अमरूबैंड के पास रोडवेज बस में भारी-भरकम पत्थर गिरने से 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 लोग घायल हो गए थे। सुधारीकरण के बावजूद इस मार्ग पर आवाजाही में खतरा अब भी कम नहीं हुआ है। हाइवे का बंद होना ही नहीं, बल्कि यहां खोखले और आड़े-तिरछे पेड़ों से भी खतरा बना है। इस मामले में चल्थी पुलिस ने बाकायदा पत्र भी भेजा है।
एनएच पर सूखीढांग से चल्थी के बीच के करीब 12 किलोमीटर के हिस्से में आवाजाही खतरे से खाली नहीं है। यहां रोड के किनारे आठ स्थानों पर लंबे और भारी-भरकम पड़े खतरे का सबब बने हैं। कुछ पेड़ एकदम तिरछे हो गए हैं और कभी भी गिर सकते हैं। कुछ पेड़ों की जड़ें खोखली है।
वैसे आपदा प्रबंधन विभाग ने भी एनएच पर अमरूबैंड, सिन्याड़ी, चल्थी, बेलखेत, धौन, बाराकोट, छीड़ा, सिंगदा, घाट में 19 स्थानों को संवेदनशील माना है। चल्थी पुलिस चौकी के प्रभारी विनोद जोशी ने पेड़ों से खतरे की आशंका के मद्देनजर उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है। वहीं एनएच डिवीजन का कहना है कि इन पेड़ों को निस्तारित करने के लिए वन विभाग के साथ मिलकर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।