चंपावत। जिले में पर्यावरण को बचाने के नाम पर प्रतिवर्ष लाखों करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक विपरीत है। यहां तक कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के आदेशों का भी यहां पालन नहीं हो पा रहा है। शहर में पर्यावरण को संवारने को लेकर नगरपालिका की ओर से कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है। किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने से पॉलिथीन और थर्मोकोल का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। और तो और मानवाधिकार आयोग की ओर से एक साल पूर्व दिए गए निर्देशों के बाद भी अब तक ट्रंचिंग ग्राउंड का निर्माण नहीं हो सका है।
गौरतलब है कि 15 सितंबर 1997 को जिला बने चंपावत के मुख्यालय की सफाई की तस्वीर में सुधार का अब भी इंतजार है। शहर के कूड़े के निस्तारण का आज तक कोई इंतजाम नहीं हो सका है। इसके चलते नगर क्षेत्र का कूड़ा हरियाली के बीच सड़क किनारे फेंकने की मजबूरी बनी हुई है।
इसके अलावा सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट का कोई सिस्टम नहीं है। एनजीटी की ओर से पॉलिथीन और थर्मोकोल के उपयोग पर प्रतिबंध संबंधी आदेश को डेढ़ साल से अधिक का समय हो गया है। लेकिन जिले की चारों नगर निकायों में से किसी ने भी अभी तक इसका क्रियान्वयन नहीं किया है। ज्यादातर कारोबारियों को भी इस आदेश की जानकारी कायदे से नहीं है। जिले में बनबसा, टनकपुर, चंपावत, लोहाघाट, पाटी, बाराकोट सहित तमाम जगहों में थर्मोकोल डिस्पोजल का दो करोड़ रुपये से अधिक का सालाना कारोबार हो रहा है।
सेलाखोला वन पंचायत में फेंका जा रहा है कूड़ा
चंपावत। जिला मुख्यालय में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने से यहां का कूड़ा सर्किट हाउस के नजदीक खेतीखान मोटर मार्ग में सेलाखोला वन पंचायत की भूमि पर फेंका जाता है। राज्य मानवाधिकार आयोग इस पर नगर पालिका को फटकार भी लगा चुका है। आयोग ने मौजूदा कूड़ा डंपिंग जोन को सेहत के लिए खतरनाक बताते हुए प्रभावी और स्थायी समाधान के निर्देश दिए थे। पर बनलेख के पास बनने वाले ट्रंचिंग ग्राउंड की कार्रवाई अब भी लटकी है।
स्टाफ की कमी बन रही है क्रियान्वयन में बाधा
चंपावत। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अभिनव कुमार के अनुसार प्रतिबंधित क्षेत्रों में कूड़ा डालने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। स्टाफ की कमी इसके क्रियान्वयन में बाधक बन रही है। सफाई निरीक्षक का पद भी लंबे समय से खाली है। इसी के चलते फिलहाल पालिका अभी तक कूड़ा फेंकने वालों पर जुर्माना भी नहीं लगा सकी है। अलबत्ता अब प्रतिबंधित क्षेत्र में कूड़ा डालने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अनूठी मुहिम चला रहे हैं कैलाश तलनियां
चंपावत। जिले में सुंई वन पंचायत के सरपंच ने पर्यावरण को सहेजने की अनूठी मुहिम चलाई है। सरपंच कैलाश तलनियां पहाड़ में जाड़ों के लिए सूखी घास एकत्र करने के लिए लकड़ी के बजाय लोहे के पाइप लगाने को जागरूकता अभियान चलाए हुए हैं।
उनके इस अभियान से जिले में हर साल हजारों की संख्या में पेड़ों को बचाया जा रहा है। पहाड़ में पशुपालक जाड़ों के लिए सूखी घास इकट्ठा करते हैं। वह घास के इन लुट्टों को रखने के लिए चीड़ और देवदार के खंभों का इस्तेमाल करते हैं। सरपंच ने इनके स्थान पर लोहे के पाइप लगाने के लिए लोगों को जागरूक और प्रेरित करने का अभियान चला हुआ है। सरपंच का कहना है कि पहाड़ की सभी ग्राम पंचायतों में लुट्टों के लिए पेड़ों के स्थान पर पाइप लगाने के लिए शासन-प्रशासन को मनरेगा अथवा अन्य मदों से व्यवस्था करनी चाहिए।
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पर्यावरण संरक्षण में दें अपना सक्रिय योगदान
चंपावत। डीएम डॉ.अहमद इकबाल ने जिले के सभी नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण में अपना सक्रिय योगदान दिए जाने का आह्वान किया है। विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर उन्होंने कहा है कि जिला प्रशासन जिले को पॉलिथीन मुक्त बनाने के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में आम जनता की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए इसके संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया है। उन्होंने पानी को प्रदूषित न करने, विश्व पर्यावरण दिवस के अलावा भी अन्य दिवसों में भी पानी को बरबाद न कर उसका संरक्षण करने को कहा है। उन्होंने कहा है कि पांच जून को गौड़ी नदी तथा सड़क के किनारे और टनकपुर में पौध रोपित किए जाएंगे। उन्होंने सभी अधिकारियों, कर्मचारियों को भी विश्व पर्यावरण के दिवस पर अपने-अपने कार्यालय परिक्षेत्र में पौधरोपित कर पर्यावरण को बचाने में सहयोग करने को कहा।